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महापंचायतों के रास्ते अब गांवों की पंचायतों तक पहुंची आंदोलन की हुंकार

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हरियाणा में महापंचायतों के रास्ते अब हर गांव की पंचायत तक किसान आंदोलन पहुंच रहा है। एक ओर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्त राकेश टिकैत महापंचायतों के जरिए किसानों के तक पहुंच रहे हैं, जिला स्तर की इकाइयां गांव की पंचायतों पर फोकस कर रही हैं। मकसद है कि हर किसान तक आंदोलन की जरूरत को पहुंचाया जा सके। तीनों कृषि कानूनों के बारे में बताया जाए और उनके हक की बात की जाए।
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पानीपत में हर दूसरे दिन एक गांव में पंचायत का आयोजन किया गया जा रहा है। किसान नेताओं का कहना है कि बीते एक महीने में 15 गांवों में पंचायत कर चुके हैं और हर दूसरे दिन किसी एक भी एक गांव में पंचायत कराने का लक्ष्य लेकर चला जा रहा है। जिले के 195 गांवों तक पहुंच कर किसान आंदोलन को मजबूती देने का काम ग्रासरूट लेवल पर रणनीति के तहत किया जा रहा है। कृषि कानूनों के खिलाफ हर गांव में माहौल बनाने का प्रयास है कि किसान एकजुट रहें और आंदोलन को गति जरा सी भी थमे नहीं। भारतीय किसान यूनियन की जिला इकाइयां सरकार के साथ गतिरोध के बीच ब्लॉक स्तर पर हर गांव में आंदोलन को मजबूती देने में जुटीं हैँ और आने वाले दिनों में उनका हर गांव तक पहुंचने का प्रयास और तेज ही होता दिखा रहा है।
- सिर्फ दिल्ली की सीमाओं में ही नहीं, हर गांव में खड़ा होगा आंदोलन
किसान नेताओं की मानें तो हर गांव में पंचायत करने का आंदोलन को सीधा लाभ मिलेगा। अब सिर्फ हरियाणा और दिल्ली की सीमाओं पर ही नहीं बल्कि हर गांव में खड़ा होगा। दिल्ली में 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली के बाद से ही महापंचायतों का दौर शुरू और अब पंचायतों का दौर शुरू हो चुका है।
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पुलिस और प्रशासन के दखल को दूर रखने के लिए अब गुपचुप तरीके से गांव में छोटे समूह में पंचायतें की जा रहीं हैं। असल में, शुरुआत की कुछ पंचायतों का पता चलने पर पुलिस ने गांवों में पहुंचाना शुरू कर दिया था। जिससे किसानों को परेशानी होने लगी, ऐसे में अब रणनीति के साथ काम किया जा रहा है।
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