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Panipat News: श्रीमद्भागवत कथा में अजामिल ब्राह्मण की कथा सुन भावविभोर हुए लाेग

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पानीपत। इस्कॉन कुरुक्षेत्र के अध्यक्ष साक्षी गोपाल दास ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा में अजामिल ब्राह्मण की कथा सुना सबको भाव विभोर कर दिया। उन्होंने कथा सुनने और श्री कृष्ण भक्ति के लिए लोगों को प्रेरित किया। वहीं श्रीमद्भागवत कथा व भगवान कृष्ण बलराम रथयात्रा महोत्सव का मंगलवार को तीसरे दिन शुभारंभ प्रभात फेरी से हुआ। श्री मद्भागवत कथा और श्री कृष्ण बलराम रथयात्रा के बारे में सुरेश जिंदल ने विस्तार से बताया।
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साक्षी गोपाल दास ने कथा व्यास करते हुए बताया कि काम्या कुंज नाम के नगर में एक अजामिल नाम का ब्राह्मण रहता था। एक दिन वह जंगल में गया। भगवान को अर्पित करने के लिए फूल फल और हवन करने के लिए लकड़ी लेने के लिए गया। जब जंगल से वापस लौट रहा था तो उसने एक वेश्या को एक शूद्र के साथ देखा। जिसको देखकर उसका मन बिगड़ गया। जब वह अपने घर गया तो उसका भगवान की पूजा में मन नहीं लगा और बार बार वही दृश्य उसके आखों के सामने आ रहा था। वह अपने आप को संभाल नहीं पाया और उसने अपनी पूजा को छोड़ दिया और उसी स्थान पर चला गया और वह जाकर उसने पाया कि वह वो वेश्या नहीं थी। तो उसने उस वेश्या का पता कराया और पता करके उस वेश्या को अपने धन के बलबूते पर अपने घर में नौकरानी के रूप में रख लिया।
उसकी पत्नी ने इसका विरोध किया तो अजामिल ने अपने पत्नी को भी घर से निकाल दिया। उसने फिर चोरी करनी शुरू कर दी। अनेक प्रकार के पाप करने लगा। इस तरह से उसका पूरा जीवन पापमय हो गया। महात्मा भी अजामिल की दशा को देखकर हैरान हो गए और महात्मा को दया आ गई तो संत महात्मा ने विचार किया। अजामिल के घर दसवें पुत्र का जन्म होने वाला है तो महात्मा संतों ने अजामिल से दक्षिणा मांगी तो अजामिल ने पूछा क्या चाहिए। महात्मा ने कहा कि तुम पति-पत्नी वादा करो कि तुम अपने दसवें पुत्र का नाम नारायण रखोगे। अजामिल ने पुत्र का नाम नारायण रख लिया तो जब भी अजामिल अपने पुत्र को बुलाता तो वह अपने पुत्र के नाम के रूप में नारायण नारायण पुकार रहा होता। इस अवसर पर इस्कॉन प्रचार समिति के अध्यक्ष सुंदर लाल चुघ, सह अध्यक्ष अशोक गोयल, देवेंद्र महाजन, इंद्रजीत कथूरिया, प्रवीण नंदवानी, पंकज मेंहदीरत्ता, भुवन चुघ और अरविंद सिंघल उपस्थित रहे।
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