पानीपत। गड़बड़ी के लिए चर्चित नगर निगम अधिकारियों की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल उठे हैं। निगम अधिकारियों ने आधे अधूरे सामुदायिक भवनों का भुगतान ठेकेदारों को कर दिया। ऐसे में ठेकेदारों ने पेमेंट मिलने के बाद काम जहां के तहां छोड़ दिए।
गौरतलब है कि ऐसी स्थिति में सामुदायिक भवन में कहीं शौचालय अधूरे हैं तो कहीं पर गेट नहीं लग पाया है। इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। निगम अब इनको पूरा कराने के लिए फिर से टेंडर लगाने की तैयारी में है।
सामुदायिक भवन अधूरे छोड़ने की बात गत दिनों शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा के सामने बैठक में पार्षदों ने उठाया था। शिक्षा मंत्री ने पार्षद अशोक कटारिया और संजीव दहिया को वार्डों में अधूरे पड़े सामुदायिक भवनों की रिपोर्ट बनाने की बात कही थी। दोनों पार्षदों ने शहर के 12 वार्डों के सामुदायिक भवनों की रिपोर्ट तैयार की।
पार्षदों को करीब 24 सामुदायिक भवन अधूरे मिले। पार्षद अशोक कटारिया ने बताया कि ठेकेदारों ने काम पूरे नहीं किए हैं। जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। कई सामुदायिक भवनों में कहीं पर शौचालय नहीं बनाए गए हैं तो कहीं दरवाजे नहीं लगाए गए हैं।
काम के दौरान पेमेंट मिलने पर बढ़ी परेशानी : नगर निगम में प्रतियोगिता के बीच ठेकेदार निर्धारित से कम रेट में टेंडर ले लेते हैं।
नगर निगम ठेकेदारों को काम शुरू करते ही पेमेंट देना शुरू कर देता है। ऐसे में ठेकेदार पेमेंट मिलने तक काम करते हैं। इसके बाद काम बंद कर देते हैं। वार्ड-22 के पार्षद संजीव दहिया ने बताया कि ठेकेदारों को काम के दौरान पेमेंट मिलने पर इस तरह की दिक्कत पैदा हुई है।