पानीपत। नगर निगम का नई लाइटों को लगवाने और पुरानी लाइटों को ठीक करवाने में एक और गड़बड़झाला सामने आया है। निगम अब नई लाइटों के इंस्टॉलेशन का काम पुरानी लाइटों को ठीक करवाने के लिए लगाए गए मैनपावर से करवा रहा है। नई लाइटों के इंस्टॉलेशन के लिए सवा दो करोड़ का टेंडर देने के साथ पुरानी लाइटों को ठीक करवाने के लिए हर माह करीब 10 से 11 लाख रुपये खर्च है। इसके बावजूद अधिकतर वार्डों में पुरानी लाइटों को ठीक करवाने का काम बंद है। कुल मिलाकर कहें तो भुगतान दोगुना करने के बावजूद काम एक भी नहीं हो रहा।
इस तरह फर्जीवाड़ा का आरोप लगाते हुए पार्षदों का कहना है कि निगम अधिकारी जानबूझकर नई लाइट का इंस्टॉलेशन करने वाली प्राइवेट फर्म को फायदा पहुंचाने की कोशिश कर निगम को चूना लगा रहे हैं। निगम की मैनपावर को इंस्टॉलेशन फर्म को देकर उनका काम आसान किया जा रहा है जबकि इसका भुगतान पुरानी लाइटों को ठीक करवाने के नाम पर करवाया जा रहा है। यह फर्जीवाड़ा है।
गौरतलब है कि निगम ने नई स्ट्रीट लाइट इंस्टॉलेशन के लिए सवा दो करोड़ रुपये के टेंडर से एजेंसी को नई लाइटें लगानी थी। साथ ही पुरानी लाइट ठीक करवाने के लिए 47 कर्मचारी अलग से मैनपावर के टेंडर के जरिए लिए गए थे। इन पर करीब दस से 11 लाख रुपये प्रतिमाह खर्च आता है। ये टेंडर छह महीने के लिए था, जिसे कई बार रिन्यू किया चुका है। यही कर्मी फिलहाल इंस्टॉलेशन का काम कर रहे हैं। शहरवासियों समेत पार्षदों का कहना है कि आगे त्योहारों की लाइन है लेकिन शहर की कई कॉलोनियों, कई वार्डों में रात काली रहती है। खासकर निगम की ऑउटर कॉलोनियों में न तो नई स्ट्रीट लाइट लग पाई हैं और न ठीक हो पाई हैं।
बोले पार्षद
नई लाइट एक भी नहीं, पुुरानी 70 खराब
अब तक वार्ड में एक भी नई लाइट नहीं लग पाई है। वहीं, 70 पुुरानी लाइटों आज तक खराब पड़ी हैं। वार्ड में आने वाली रिपेयरिंग की टीम को भी बैरंग लौटा दिया गया। निगम को खुली चेतावनी है कि वे इस भ्रष्टाचार का पुरजोर विरोध करते रहेंगे। -अशोक कटारिया, पार्षद, वार्ड नंबर 7
80 प्रतिशत लाइटें पड़ी हैं खराब
वार्ड में अब तक करीब 80 प्रतिशत पुरानी लाइटें खराब हैं। इनको अब तक रिपेयर नहीं करवाया गया है। कभी मैनपावर नई लाइटों के काम पर लगा दी जाती है तो कभी रिपेयरिंग का सामान उपलब्ध नहीं होता। जल्द ही रणनीति तक बनाई जाएगी। -पवन गोगलिया, पार्षद वार्ड नंबर दो।
निगम ने एसआर इंटरप्राइजेज कंपनी को इंस्टॉलेशन का काम दिया है। इसके लिए हमें 15 टीमों की जरूरत थी। कंपनी के पास पर्याप्त टीम नहीं थी। काम का दबाव ज्यादा था इसलिए मैनपावर से ही नई लाइटों का काम करवाया जा रहा था। जो काम निगम की मैनपावर करेगी वह रिकार्ड में दर्ज होगा और इसका भुगतान इंस्टॉलेशन टेंडर के भुगतान से काट लिया जाएगा। अब कंपनी ने भी सात नई टीमें भेजी हैं। -गौरव सोनी, जेई, इलेक्ट्रिकल विंग, नगर निगम, पानीपत।