पानीपत। पानीपत के सोफा कपड़ा की अपने ही बाजार में मांग घट गई है। इसकी जगह चाइना (चीन) के कपड़े ने ले ली है। ऐसे में सोफा कपड़ा उद्योग बंद होने के कगार पर है। कई सोफा कपड़ा उद्यमियों ने इसकी मशीनों को बेचकर दूसरा काम भी शुरू कर लिया है। उद्यमियों के अनुसार सोफा कपड़े का उद्योग करीब 10 प्रतिशत रह गया है।
टेक्सटाइल नगरी पानीपत में आज से तीन-चार साल पहले सोफे के कपड़े की करीब पांच हजार फैक्टरी थी। देश के घरेलू बाजार के साथ नेपाल, भूटान, बांग्लादेश व श्रीलंका में कपड़ा जाता था। उद्यमियों के अनुसार एक समय में करीब एक इकाई का करीब 10 करोड़ तक का सालान टर्न ओवर था। इसके बाद चाइना का साेफा कपड़ा बाजार में आ गया। ऐसे में पानीपत में निर्मित सोफा कपड़ा चाइना आयातित कपड़े के आगे फीका लगने लगा। इसकी धीरे-धीरे मांग कम होने लगी। यहां के कपड़े की बाजार में मांग घटने लगी। जिसके चलते उद्यमियों के सामने उद्योग को चला पाना भी मुश्किल हो गया। कई उद्यमियों ने सोफे का कपड़ा बनाना बंद कर दिया। इसकी मशीनें भी बेच दी। कई उद्यमियों ने दरी व गलीचा बनाना शुरू कर दिया है।
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ऐसे हुई मांग कम
चाइना के कपड़े की सफाई अच्छी है और रेट बहुत कम है। टेक्नोलॉजी में आज भी आगे हैं। व्यापारी एक बार के ऑर्डर पर एक लाख मीटर कपड़ा भी मंगवा लेते हैं। इसका रेट 60 से 70 रुपये मीटर है। यहां एक उद्यमी एक महीने 50 हजार मीटर कपड़ा बना पाते हैं। यहां तैयार कपड़ा 150 मीटर तक दे पाते हैं। इसकी सफाई भी अपेक्षाकृत नहीं है। उद्यमी सुखदेव कालड़ा ने बताया कि उनकी सोफा कपड़ा की फैक्टरी है। तीन साल पहले से आज आधे से भी कम काम रह गया है। फैक्टरी को चला पाना भी मुश्किल हो गया है।
वर्जन :
पानीपत में सोफा कपड़े की मांग लगातार घट रही है। जबकि चाइना के कपड़े की मांग बढ़ रही है। ऐसे में फैक्टरी लगातार बंद हो रही हैं। अब 10 प्रतिशत फैक्टरी रह गई हैं। सरकार को सोफा उद्योग को बचाने के लिए आगे आने की जरूरत है।
राकेश चुघ, प्रधान, पानीपत इंडस्टि्रल एसोसिएशन।