बिजली निगम के बढ़ते घाटे से तंग आकर सरकार ने निगम को निजी हाथों में देने की योजना बनाई है।
योजना के पहले चरण में निगम ने सर्कल की सभी 11केवी एचटी और एलटी लाइनों की मेंटेनेंस से लेकर उनके दैनिक फाल्ट और फीडर ब्रेकडाउन होने पर फीडर अटेंडिंग का काम प्राइवेट कंपनियों को सौंप दिया है।
निगम ने प्राइवेट एजेंसियों से डिविजन वाइज टेंडरों के लिए अलग-अलग आवेदन मांगे हैं।
बिजली निगम ने प्रदेशभर में 11केवी एचटी लाइन और एलटी लाइनों की मेंटेनेंस से लेकर उपभोक्ताओं के घरों तक सप्लाई पहुंचाने का काम निजी हाथों में देने की योजना बनाई है। निगम ने ट्रायल के तौर पर इस योजना की शुरुआत करने के लिए पानीपत सिटी डिविजन सहित सात डिविजनों को शामिल किया है।
निगम ने इन डिविजनों का काम कंपनियों केे हैंडओवर करने के लिए टेंडर भी जारी कर दिए हैं। यदि निगम की यह योजना ट्रायल में सफल हुई तो निगम इसे प्रदेश स्तर पर लागू करेगा।
बिजली निगम ने ट्रायल के तौर पर योजना की शुरुआत, सिटी डिविजन पानीपत, बहादुरगढ़ डिविजन, सिटी डिविजन सोनीपत, अंबाला कैंट डिविजन, ओल्ड फरीदाबाद डिविजन, सब अर्बन डिविजन गुड़गांव, सिटी डिविजन नंबर-1 हिसार से होगी।
निगम ने इन डिविजनों के अंतर्गत आने वाले उपभोक्ताओं, ट्रांसफार्मर, लाइनों की लंबाई और टोटल लोड के आंकड़े भी जारी कर दिए हैं।
सिटी डिविजन पानीपत के अंतर्गत आने वाले तीन सब डिविजनों के 86 फीडर कंपनी हवाले किए जाएंगे। इसके शहर के करीब 90 हजार उपभोक्ताओं की शिकायतों का समाधान कंपनी कर्मी करेंगे।
शहर की 384 किलोमीटर 11 केवी एचटी लाइन और 984 किलोमीटर लंबी एलटी लाइनें की मेंटेनेंस के लिए निगम कंपनी केे हर माह दो लाख रुपये देगा। यह जिम्मेदारी किस कंपनी को मिलेगी इसका फैसला 18 सितंबर को शाम के समय टेंडर ओपन होने के साथ ही हो जाएगा।
योजना के मुुताबिक लाइनों की मेंटेनेंस के साथ, ट्रांसफार्मर, वीसीबी और उपभोक्ताओं के घरों तक बिजली आपूर्ति में होने वाली बाधा का समाधान भी कंपनी कर्मी ही करेंगे। यहीं ही नहीं एचटी लाइनों और अंतर्गत आने वाले पावर हाउस से बिजली सप्लाई का काम भी कंपनी ही करेगी।
बिजली निगम यूनियनों ने भी निगम के फैसले का विरोध करना शुरू कर दिया है। ऑल हरियाणा पावर कार्पोरेशन वर्कर यूनियन के सर्कल सचिव तेजपाल ने बताया कि इस समय निगम का घाटा करीब 30 हजार करोड़ से भी ऊपर हो गया है और बैंक कर्ज भी 54 हजार करोड़ रुपये के करीब है।
निगम का यह घाटा दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। इसके लिए बिजली चोरी या कर्मचारी जिम्मेदार नहीं है। बल्कि निगम प्रशासन और सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं। एचएसईबी वर्कर यूनियन के इसराना यूनिट प्रधान तेजबीर मान ने भी इस फैसले की कड़े शब्दों में निंदा की।
बिजली निगम ने प्रदेश के सात डिविजनों की एचटी और एलटी लाइनों की मेंटेनेंस काम प्राइवेट एजेंसियों को देने के लिए टेंडर लगाए हैं। यदि निगम की यह योजना ट्रायल में सफल रही तो इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।
देवव्रत शर्मा, प्रवक्ता, बिजली निगम, पंचकूला।