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एंबुलेंस के इंतजार में तोड़ा बच्ची ने दम

Wed, 26 Aug 2015 11:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला पानीपत
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शहर की बतरा कॉलोनी के बाद पप्पू कॉलोनी में भी डायरिया से तीन साल की एक बच्ची की मौत हो गई। डायरिया से अब तक की यह सातवीं मौत है।
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परिजनों ने बच्ची की मौत होने में डॉक्टरों और एंबुलेंस चालक पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। परिजनों का आरोप है कि सिविल अस्पताल में समय पर एंबुलेंस न मिलने पर बच्ची की मौत हुई है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने मामले की शिकायत मिलने पर जांच बैठा दी है।

पक्का काबड़ी फाटक स्थित पप्पू कॉलोनी निवासी जसवंत की तीन वर्षीय लड़की लक्ष्मी की बुधवार को सिविल अस्पताल में मौत हो गई। परिजनों में बच्ची की मौत के बाद मातम छा गया और डॉक्टरों और एंबुलेंस कर्मियों पर इलाज में लापरवाही बरतने और एंबुलेंस न देने का आरोप लगाया। परिजनों ने इसकी सीएमओ को भी लिखित शिकायत दी।
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जसवंत ने बताया कि वह मूल रूप से यूपी के शाहजहांपुर का रहने वाला है और पानीपत की पप्पू कॉलोनी में रहता है। वह एक ठेकेदार के पास बेलदार का काम करता है और वह बुधवार सुबह घर से अपने काम पर चला गया। इसी बीच उसके घर से लक्ष्मी को उल्टी दस्त होने की सूचना मिली। वह सीधा घर आया और अपनी बेटी लक्ष्मी को लेकर सिविल अस्पताल पहुंचा।

जसवंत ने बताया कि वह 11 बजे सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में आया था और यहां पर डॉक्टर ने उसकी बेटी लक्ष्मी को ग्लूकोज लगाकर पीजीआई खानपुर रेफर कर दिया। वह डॉक्टर की पर्ची लेकर एंबुलेंस लेने गया। लेकिन एंबुलेंस कार्यालय में तैनात एक कर्मी ने उससे खानपुर जाने के लिए दो हजार रुपये लगने की बात कही।

वे दो हजार रुपये देने की स्थिति में नहीं थे और डॉक्टर के पास वापस आ गए। यहां से डॉक्टर ने एंबुलेंस सेंटर पर फोन किया और मामला गंभीर होने की बात कही। वह एंबुलेंस सेंटर पर गया। लेकिन यहां पर तैनात कर्मी ने उसको एक घंटे बाद चलने की बात कही। वह बच्ची को लेकर एंबुलेंस का इंतजार कर रहे थे और इसी बीच बच्ची ने दम तोड़ दिया।

दादा राजेंद्र ने बताया कि वे अपनी पोती लक्ष्मी को उल्टी दस्त लगते ही सिविल अस्पताल लेकर पहुंच गए थे। उनको उम्मीद थी कि अस्पताल में इलाज मिलने पर बच्ची को बचाया जा सकता है। उसका आरोप है कि एंबुलेंस सेंटर के कर्मियों की लापरवाही से उनकी तीन साल की पोती ने हाथों में ही दम तोड़ दिया।

बतरा कॉलोनी गत माह डायरिया ब्रेक हो गया था। जिसमें छह बच्चों की मौत हो गई थी। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने कॉलोनी में अभियान चलाया था। बतरा कॉलोनी में डायरिया काबू कर लिया, लेकिन आसपास की दूसरी कॉलोनियों में डायरिया अपने पैर पसारने लगा।

एंबुलेंस सेंटर के मैनेजर ऋषिपाल ने बताया कि डायरिया का केस डॉक्टर द्वारा रेफर किया गया था और पीजीआई खानपुर तक फ्री किया गया था। ऐसे मरीज पर पैसे लेने का कोई औचित्य नहीं बनता।

उन्होंने डायरिया का मामला आने पर डिप्टी सीएमओ और दूसरे अधिकारियों से दो फोन कर मामले को कन्फर्म किया था। इसके तुरंत बाद एंबुलेंस को भेज दिया गया था। इसमें किसी भी कर्मी या ड्राइवर का कोई कसूर नहीं है और परिजनों की ओर से लगाए आरोप निराधार हैं।
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सिविल अस्पताल में डायरिया से गंभीर बच्ची आई थी। डॉक्टर ने उसको रेफर कर दिया था। परिजन एंबुलेंस सेंटर के बजाय प्राइवेट एंबुलेंस के पास चले गए। उन्होंने इसको लेकर दो हजार रुपये मांग लिए। सरकारी एंबुलेंस को सूचना मिलते ही तुरंत तैयार कर दिया था। इसी बीच बच्ची की मौत हो गई। इस मामले की जांच कराने के आदेश दिए हैं और परिजनों से भी बात की जाएगी।
इंद्रजीत धनखड़, सीएमओ, पानीपत
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