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बिजली निगम के एमडी ने अपनी कही, सुनने के लिए नहीं रुके

Tue, 24 Jan 2017 11:47 PM IST
amar ujala beuro panipat
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- फोटो : amar ujala
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उत्तर और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के प्रबंधक निदेशक शत्रुजीत कपूर बिजली निगम की दो प्रभावशाली योजना लेकर जिले के पंचायत प्रतिनिधियों के बीच में पहुंचे। निगम की योजनाओं की जानकारी देने के साथ ही बिजली चोरी रोकने में भी सहयोग की मांग की। जनप्रतिनिधियों की सुनने का समय आया तो प्रबंध निदेशक चंडीगढ़ में जरूरी मीटिंग होने की बात कहकर चले गए। हालांकि, कई जनप्रतिनिधियों ने जाते-जाते अपनी कई समस्याएं रखीं। प्रबंधक निदेशक उनकी शिकायत लेकर सर्किल इंजीनियर को देकर चले गए।
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बिजली निगम ने मंगलवार को आर्य पीजी कॉलेज के ऑडिटोरियम में पंचायत और नगर निगम प्रतिनिधियों की बैठक की। मुख्य अतिथि उत्तर एवं दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के अध्यक्ष एवं प्रबंधक निदेशक शत्रुजीत कपूर थे। बैठक की अध्यक्षता निगम के सर्किल इंजीनियर एके रहेजा ने की।

प्रबंधक निदेशक शत्रुजीत कपूर ने करीब 15 मिनट तक बिजली निगम की बिल ब्याज माफी और स्वैच्छिक घोषणा की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरपंच और पंच गांव के लोगों को इन योजनाओं की जानकारी दें। जनप्रतिनिधि बिजली चोरी रोकने में भी निगम का सहयोग करें। बताया कि पानीपत जिले में इस तरह के करीब 29 हजार उपभोक्ता थे। सरकार ने नोटबंदी के दौरान दो योजनाओं को शुरू किया। इसके बाद करीब छह हजार उपभोक्ता सामने आए। उन्होंने 31 जनवरी तक बाकी बचे लोगों को भी योजना का लाभ लेने के लिए सामने आने की सलाह दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुछ लोगों के बिजली चोरी करने से निगम घाटे में चल रहा है। पढ़ी-लिखी पंचायतों को इसके लिए आगे आना चाहिए। प्रबंधक निदेशक ने कहा कि बिजली के बिल न भरने का खामियाजा उपभोक्ता को ही भुगतना पड़ता है। यदि बिजली चोरी रुक जाए तो 24 घंटे तक बिजली मिल सकती है। प्रबंधक निदेशक शत्रुजीत कपूर ने म्हारा गांव जगगम योजना लागू कराने में सहयोग देने पर निगम के वार्ड-18 पार्षद संजीव दहिया, ब्राह्मण माजरा गांव के सरपंच मनीष, पसीना कलां पंचायत सरपंच को सम्मानित किया।
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इंवर्टर और बिजली का गणित समझाया
प्रबंधक निदेशक शत्रुजीत कपूर ने पंचायत प्रतिनिधियों को इंवर्टर और बिजली का गणित समझाया। उन्होंने बताया कि इंवर्टर लगवाते समय 30 से 35 हजार रुपये देने पड़ते हैं। इसको चार्ज होने में करीब 20 प्रतिशत बिजली की खपत होती है। दो या ढाई साल में इसकी बैटरी भी बदलवानी पड़ती है। उपभोक्ता इंवर्टर पर खर्च करने वाले पैसों से बिजली का बिल भर दें। इससे उन्हें पर्याप्त बिजली मिल सकती है। कुछ लोग हीटर पर खाना बनाते हैं। वे रसोई के लिए गैस सिलेंडर ले लें।

युवा पीढ़ी गांवों की बजाय स्लम बस्तियों में रहना पसंद करती है
प्रबंधक निदेशक ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में बिजली का शेड्यूल 12 घंटे का है। इनमें से भी कई घंटे की बिजली लाइन लॉस में चली जाती है। ऐसे में मुश्किल से आठ घंटे या कई बार इससे भी कम बिजली मिल पाती है। युवा पीढ़ी अब बदल रही है। वे इन सबके चलते गांवों की जगह शहरों की आउटर कॉलोनियों में आकर बस रहे हैं। महानगरों में इन्हें स्लम बस्तियों के रूप में जाना जाता है। वे कुंडी लगाने की बजाय बिजली का मीटर के माध्यम से प्रयोग करें और बिल का भुगतान समय पर करें। कई बार निगम की गलती से बिल अधिक चला जाता है। वे इसको पुन: ठीक करने का भी प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि एलईडी बल्ब, एलईडी ट्यूब और पंखों का प्रयोग करें।  

प्रबंधक निदेशक समस्या सुनने के वक्त बच निकले
प्रबंधक निदेशक शत्रुजीत कपूर पंचायत प्रतिनिधियों को अपनी बात रखने के बाद मीटिंग के चलते चंडीगढ़ पहुंचने की बात कहकर चले गए। जाते-जाते कई प्रतिनिधियों ने उनके सामने अपनी समस्या रखी। नंगला पार सरपंच ने कहा कि बिजली निगम घर-घर बिल पहुंचाने का प्रबंध करें। बिजली के नए कनेक्शनों को लेकर फाइल जमा कराने की कार्रवाई को बंद कर निगम की टीम पंचायत प्रतिनिधियों को साथ लेकर मीटर लगाए। फरीदपुर सरपंच कुलवंत ने कहा कि पिता की मौत के बाद उनका पेंडिंग बिल नया कनेक्शन लेते समय बेटे से मांगा जाता है। इस पर प्रबंधक निदेशक ने कहा कि निगम की योजना है कि उक्त व्यक्ति अपनी पिता के संपत्ति के हिस्से का ही बिल जमा कर नया कनेक्शन ले सकता है। प्रबंधक निदेशक इसके बाद हाउस को छोड़कर चंडीगढ़ रवाना हो गए।
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