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कलेसर के लाल डांग के जंगलों में बंदरों को छोड़ने की अनुुमति मिली, अब ठेकेदार को निगम से आदेश का इंतजार

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शहर को बंदरों से आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए टेंडर एवं वर्कर आर्डर जारी होने के 16 दिन बाद आखिर कलेसर के लाल डांग के जंगलों में उन्हें छोड़ने की अनुमति बुधवार को मिल गई। मेयर अवनीत कौर बुधवार को वन विभाग से अनुमति लेकर आईं। हालांकि अभी ठेकेदार को नगर निगम ने बंदर पकड़ने का काम शुरू करने का निर्देश नहीं दिया है। निर्देश मिलने के बाद मैनपावर जुटाने के बाद ठेकेदार काम शुरू करेगा। संभावना जताई जा रही है कि अगले सात दिन में बंदरों को पकड़ने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
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19 फरवरी को नगर निगम ने लिखा पत्र, 25 फरवरी को प्राप्त हुई अनुमति
नगर निगम पानीपत की ओर से बंदरों को पकड़ने की प्रक्रिया के तहत टेंडर तो 11 फरवरी को ही जारी कर दिया गया, लेकिन आठ दिन बाद तक भी वन विभाग से बंदरों को जंगल में छोड़ने की अनुमति नहीं ली गई थी, जबकि टेंडर की शर्त के अनुसार टेंडर और वर्क आर्डर जारी होने के सात दिन के अंदर बंदरों को पकड़ने का काम शुरू करना था। इस हद तक लापरवाही रही कि आठ दिन तक ठेकेदार खाली बैठा अनुमति का ही इंतजार करता रहा। जिसके बाद 19 फरवरी को नगर निगम ने वन विभाग को पत्र लिखा और मंगलवार यानी 25 फरवरी को कलेसर के लाल डांग में बंदरों को छोड़ने की अनुमति मिल गई। एक सप्ताह से अधिक समय की देरी में नगर निगम की लापरवाही सामने आई।
रुपये 745 में पकड़ा जाएगा एक बंदर, दो माह में पूरा करना है काम
नगर निगम ने बंदरों को पकड़ने टेंडर उत्तर प्रदेश के मथुरा निवासी रईस खान को दिया है। ठेकेदार रईस खान को प्रति बंदर 745 रुपये का भुगतान किया जाएगा। टेंडर की शर्तों के मुताबिक ठेकेदार को दो महीने में बंदरों को पकड़कर कलेसर के जंगलों में छोड़ने काम पूरा करना है।
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बनेगा शिकायत केंद्र, जारी होगा हेल्पलाइन नंबर
यमुनानगर के कलेसर के जंगल में बंदरों को छोड़ने के लिए सात दिन में काम शुरू होने की संभावना और इसी दौरान नगर निगम कार्यालय में एक हेल्पडेस्क बनाने के साथ ही हेल्पलाइन नंबर भी जारी करेगा। जिनके जरिए शहरवासी अपनी कॉलोनी में बंदरों के होने की जानकारी दे सकेंगे। लोगों की सूचना पर टीम भेजकर कॉलोनी से बंदरों को पकड़ा जाएगा।
बंदर पकड़ने के दौरान इन नियमों का करना होगा पालन
1. पकड़े गए बंदर पर रंग करना होगा, जिससे यह पहचाना जा सके कि बंदर को जंगल में ही छोड़ा गया है या नहीं।
2. बंदर को जंगल में छोड़ने के दौरान वीडियोग्राफी होगी, कलेसर के जंगल की अधिकारी की सत्यापित कापी भी देनी होगी।
3. बंदर को मानवीय तरीके से पकड़ा जाएगा, उसके खानपान और रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी ठेकेदार की है।
4. ठेकेदार बंदरों को पकड़ने के साथ की कलेसर के जंगल में छोड़कर भी आएगा।
5. पकड़ने के दौरान किसी भी बंदर की मौत हो जाती है तो उसे ठेकेदार उपयुक्त तरीकेे से दफ्नाएगा।
चंडीगढ़ में सीएम में ओएसडी अलोक वर्मा और वन विभाग के आईएफएस से मिलकर बंदरों को पकड़ने के बाद कलेसर के लाल डांग के जंगल में छोड़ने की अनुमति प्राप्त हो गई है, जल्द ही काम शुरू किया जाएगा। - अवनीत कौर, मेयर, नगर निगम, पानीपत।
बंदरों को पकड़ने की अनुमति प्राप्त हो गई है। इस बारे में ठेकेदार को निर्देश देकर जल्द ही बंदरों को पकड़ने का शुरू किया जाएगा, जिससे लोगों को बंदरों से परेशानी नहीं हो। - औमप्रकाश, आयुक्त, नगर निगम, पानीपत।
नगर निगम से निर्देश मिलने के बाद दो दिन मैन पावर का इंतजाम करने में लगेंगे, जिसके बाद पिंजरे लाकर बंदरों को पकड़ने और जंगल में छोड़ने का काम शुरू कर दिया जाएगा। - रईस खान, ठेकेदार
बंदरों को पकड़ने के लिए छत पर लगाया जाएगा पिंजरा
बंदरों को पकड़ने के लिए ठेकेदार शहर में 50 से अधिक पिंजरों का इस्तेमाल करेगा। अब बंदरों को पूर्व की तरह हाथों से पकड़ा नहीं जाएगा, जिसमें उन्हें चोट भी लग जाती थी। अब घरों और इमारतों की छतों पर पिंजरों का रखा जाएगा। इन पिंजरों में खाने की सामग्री रखी जाएगी और बंदर के पिंजरे मेें आते ही गेट बंद हो जाएगा। जंगल में छोड़ने के एक बार में करीब 35 से 40 बंदरों को ले जाया जाएगा।
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