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धागे की कीमत बढ़ी तो दोबारा चीन जाने को मजबूर पानीपत के उद्यमी

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Panipat entrepreneurs forced to go to China again if yarn price rises - फोटो : Panipat
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भारत- चीन बॉर्डर पर तनाव कम होने के बाद अब पानीपत के उद्यमी दोबारा चीन के साथ व्यापार करेंगे। पानीपत के यार्न उद्यमियों की बीजिंग के उद्यमियों के साथ लगातार बातचीत भी चल रही है। उद्यमी चीन से सल्ब ( कहीं से मोटा कहीं से पतला) यार्न को बनाने की तकनीक लाने की प्रयास में है । भारत में फिलहाल ये तकनीक नहीं है। चीन से मशीनों का आयात रुकने के कारण उद्यमी स्वदेशी मशीनों से ही से धागा बना रहे हैं, लेकिन इसकी लागता महंगी पड़ रही है। इसलिए धागे के भी दाम दोगुना तक बढ़ गए हैं। अब चीन से आने वाली मशीनों से धागे का उत्पादन होगा तो धागे की कीमत भी कम होंगी।
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पानीपत रंगीन धागा बनाने में विश्व में नंबर वन है। हर रोज पानीपत में 20 लाख किलोग्राम रंगीन धागा बनाया जा रहा है। ये धागा जर्मनी की अत्याधुनिक मशीनों से बनता है। पतला धागा बनाने में पानीपत देश में नंबर वन बन चुका है, लेकिन धागे की कीमत अधिक होने से खरीदार मिलने में बड़ी मुश्किल हो रही है। छोटे उद्यमियों को लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। देश में सल्ब धागा बनाने की अत्याधुनिक मशीनें उपलब्ध नहीं हैं। इन मशीनों के लिए उद्यमियों को चीन का रुख करना पड़ रहा है।
पानीपत के धागे से विदेशों में टी शर्ट बननी शुरू हो गई है। पानीपत पतला धागा बनाने में कीर्तिमान हासिल कर चुका है। अब पानीपत की नजरे सल्ब धागे पर है। इस धागे का इस्तेमाल कुर्ते पयजामे और होम फर्निसिंग के उत्पाद बनाने में होता है। अब पानीपत के उद्यमियों की चीन की कई कंपनियों के साथ डील भी हुई है। अप्रैल के अंत तक ये मशीनें पानीपत में लाने का लक्ष्य है।
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