एसडी पीजी कॉलेज में वीरवार को रंगकर्मियों ने अपने नाटक व शिक्षाविदों ने अपने संदेशों से स्वामी विवेकानंद के जीवन और उनके अनुभवों को अवगत कराय। और भारतीय संस्कृति को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने का श्रेय भी स्वामी विवेकानंद को दिया। विद्यार्थियों ने स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं व संदेशों को सुने और अपने सवालों के जवाब सुनकर जिज्ञासा को शांत किया।
एसडी पीजी कॉलेज में वीरवार को स्वामी विवेकानंद जयंती राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाई और विवेकानंद साहित्य और युवा संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि विवेकानंद केंद्र की हरियाणा व पंजाब प्रांत संगठक अलका गौरी जोशी और मुख्य वक्ता रेवाड़ी प्रांत संपर्क सूत्र एवं विवेकानंद कार्यकर्ता रणदीप सिंह रहे। प्रबंधकारिणी के प्रधान दिनेश गोयल और प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा ने अतिथियों का स्वागत किया और दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मंच का संचालन डॉ. संगीता गुप्ता ने किया।
मुख्य वक्ता रणदीप सिंह ने कहा कि केवल खुद कि अनुभूति करना बेहद खतरनाक होता है। व्यक्ति में दूसरों के भावों और मन को समझने का गुण भी होना चाहिए। स्वामी विवेकानंद को जानने और समझने के लिए मानव भाव और मानवीय गुण होने नितांत आवश्यक हैं। बच्चे माता-पिता का विस्तार है और जो बच्चे इन संस्कारों और विस्तार के पावन भाव से वंचित रहते हैं, वहीं गलत रास्ते पर चल पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि अपने घर में मां-बहन का सम्मान न करने वाले लोग ही समाज में महिलाओं पर होने अपराधों में लिप्त पाए जाते हैं। इंटरनेट द्वारा लोगों को बौद्धिक गंदगी परोसी जा रही है। यह एक चिंता का विषय है। स्वामी विवेकानंद व शिवाजी इसी व्यक्तित्व के स्वामी थे। उन्होंने छात्र-छात्राओं के सवालों का जवाब भी दिया।
विवेकानंद केंद्र की हरियाणा व पंजाब संगठक अलका गौरी जोशी ने कहा कि क्लासरुम शिक्षा का हमारे जीवन में कोई औचित्य नहीं है, जब तक हम संस्कारो से खुद को युक्त ना करें। प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा ने कहा कि आज के युवाओं कि दशा और दिशा हम सबने ही निर्धारित करनी है। पारंपरिक शिक्षा से कहीं अधिक मूल्यवान संस्कार युक्त शिक्षा है। दोपहर बाद के सत्र में मानवी ने स्वामी विवेकानंद के जीवन पर अपने विचार सबसे सांझे किए। गुरुग्राम, करनाल और अंबाला के कालेजों के विद्यार्थियों ने स्वामी विवेकानंद नाटक का भी मंचन किया। रंगकर्मियों ने अपने नाटक में स्वामी विवेकानंद की शिक्षा व संदेशों के साथ भारतीय संस्कृति की भी छाप बिखेरी। इस अवसर पर डॉ. आरपी सैनी, डॉ. सुरेंद्र कुमार वर्मा, डॉ. राकेश गर्ग, प्रो. यशोदा अग्रवाल, प्रो. इंदु पुनिया, प्रो. मयंक अरोड़ा व दीपक मित्तल मौजूद रहे।