साहब! बिजली का बिल माफ कर दो। बिजली का बिल बहुत ज्यादा है और मैं इसको जमा करा पाने में असमर्थ हूं। इस पर चेयरमैन बोले सात साल फ्री बिजली जलाई। अब तो बिल भरना पड़ेगा। वे चाहे तो किश्तों में भर सकते हैं।
एक बिजली उपभोक्ता व सीजीआरएफ के चेयरमैन के बीच खुले दरबार में कुछ इस तरह से बात हुई। उन्होंने सर्कल कार्यालय में मासिक खुले दरबार में 11 शिकायतों को सुनकर संबंधित अधिकारियों को समाधान करने के आदेश दिए। वहीं शोंधापुर स्थित एकता कालोनी के लोग खुले दरबार में पहुंचे।
उन्होंने सीजीआरएफ के चेयरमैन वीएस मान से बिजली बिल माफ करने और बिल ठीक करवाने की गुहार लगाई। मामला समझने के बाद चेयरमैन ने बोला सात साल फ्री में बिजली जलाई है अब तो बिल जमा करा दो, किश्त में ही जमा करा देना। इसके बाद कालोनी वासी किश्तों में बिल जमा कराने को राजी हो गए।
इस मौके पर एक्सईएन सिटी पंकज धवन, एसडीओ ललित अत्रीए, सडीओ इसराना अनिल श्योकंद, हेड क्लर्क सूबे सिंह व जेई सुभाष गौतम मौजूद रहे।
2014 में बनाया घर, बिल भेज दिया 2011 से
शोंधापुर चौक निवासी एक वृद्ध महिला बिजली बिल गलत होने का दावा लेकर खुले दरबार में पहुंची। उन्होंने आरोप लगाया कि निगम द्वारा 2011 से बिल बनाकर नौ हजार 512 रुपये भेज दिया। जबकि घर 2014 में बनाया था। बिल भी जमा करा दिया गया था, लेकिन अब की बार फिर गलत बिल भेज दिया गया। वह काफी समय से निगम अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ रहे है। निगम की लापरवाही का खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।
बीपीएल स्कीम के चलते बिजली निगम द्वारा घरों में मीटर लगाए थे। निगम ने दस रुपये लेकर बिजली सप्लाई चालू कर दी गई। लेकिन बिजली बिल नहीं भेजे। अब 18 हजार रुपये बिल बनाकर भेज दिया है। मजदूरी करने वाले कैसे इतना बिल एक साथ जमा कराएंगे।
बिमला, एकता कॉलोनी।
बिजली निगम द्वारा मीटर लगाकर भूल गए। अब कई साल बाद 20 हजार रुपये बिजली बिल बनाकर भेज दिया। पिछले कई दिनों से अधिकारियों के चक्कर काट रही हूं। कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
रोशनी, वार्ड-18।