छात्राओं को संगीत सिखाती राजेश रानी। स्रोत : स्वयं
पानीपत। आज के आधुनिक जीवन में जहां एक सामान्य व्यक्ति की निर्वाह करना ही मुश्किल है वहां विकलांगता को मात देकर जीवन में प्रेरणा का स्रोत बनना अपने आप में एक बहुत बड़ी बात है। नारा गांव की जन्म से दृष्टिबाधित राजेश रानी ने यह कर दिखाया जिससे आज वह दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। राजेश रानी आज पानीपत के राजकीय अंध विद्यालय में शिक्षिका बनकर बच्चों को संगीत सिखा रही है। यहां तक पहुंचने का सफर राजेश रानी के लिए आसान नहीं रहा। प्रत्येक रास्ते पर परेशानियों का सामना और संघर्ष कर आज वह यहां तक पहुंची है।
राजेश रानी ने बताया कि वह जन्म से दृष्टिबाधित है। उसे बचपन से परेशानियों का सामना करना पड़ा है लेकिन परिवार के सहयोग से उसने संघर्षों का डटकर सामना किया और आज शिक्षिका बन बच्चों को संगीत सिखा रही है। बारहवीं कक्षा के बाद जब बाहर पढ़ने के लिए जाना पड़ता था तो उस समय ज्यादा परेशानी होती थी।
परीक्षा के समय उन्हें पेपर लिखवाने के लिए राइटर की जरूरत पड़ती थी कई बार राइटर समय पर नहीं पहुंचता था तो उस समय अपने विकलांग होने पर गुस्सा भी आता था तो बेबस होकर रोने के मन करता था। इस बार की कठिन परिस्थिति जीवन में कई बार आई लेकिन परिवार के सहयोग से प्रत्येक परिस्थिति को पार किया और विकलांगता को मात देकर कुछ कर दिखाने की चाह ने आज शिक्षिका के पद पर पहुंचा दिया। मैं बीस साल से शिक्षिका बनकर बच्चों को संगीत सिखा रही हूं। पहले 10 साल मैंने आर्य कन्या कॉलेज में शिक्षिका के पद पर रही उसके बाद जिले के एकमात्र राजकीय अंध विद्यालय में पदोन्नति मिली। अब पिछले 10 साल से यहां पर बच्चों को संगीत सिखा रही हूं।