पानीपत। शहर की नई वार्डबंदी के ड्रॉफ्ट पर मंगलवार शाम को एडहॉक कमेटी ने फाइनल होने की मुहर लगा दी है। इसमें शहर को अब 26 की जगह 28 वार्डों में बांट दिया गया है। इनमें से अब तक मिक्स शहरी और ग्रामीण विधानसभा के वार्डों को भी अलग अलग कर दिया गया है।
अब शहरी विधानसभा के अंतर्गत 15 वार्ड आए हैं जबकि ग्रामीण विस के अंतर्गत 13 वार्ड बने हैं। वहीं, पांच वार्डों को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है। इनमें वार्ड नंबर 7, 8, 23, 25 और 27 को एससी रिजर्व किया है। अब बीसी वार्डों के लिए ड्रॉ होगा। 28 वार्डों के आधार पर चार से पांच बीसी वार्ड बनाए जाएंगे।
वहीं, सरकार के निर्देशों पर ही महिला के लिए आरक्षित वार्डों का फैसला हो सकेगा। खास बात ये है कि ड्रॉफ्ट वार्डबंदी में सबसे बड़ा बदलाव मॉडल टाउन का किया गया है। मॉडल टाउन अब वार्ड 20 नहीं बल्कि 22 के अंतर्गत आएगा। इसे एससी से सामान्य कर दिया गया है। परिवार पहचान पत्र के हिसाब से शहर की कुल 702197 जनसंख्या को नई वार्डबंदी का आधार बनाया गया है। इसमें प्रति वार्ड की जनसंख्या के हिसाब से औसत 25078 तय की गई है। जबकि अधिकतम जनसंख्या प्रति वार्ड 30094 और न्यूनतम जनसंख्या प्रति वार्ड 20063 रखी गई है।
इसमें कुल 120610 एससी वोटर मिले हैं जबकि बीसी वर्ग के 203101 वोटर मिले हैं। गौरतलब है कि एक साल से लंबित शहर की नई वार्डबंदी के तैयार किए ड्रॉफ्ट को एडहॉक कमेटी की बैठक में सदस्यों ने पहली ही नजर में नकार दिया था। अब इसमें वार्डों की सीमाओं से लेकर आरक्षित करने को लेकर कुछ बदलाव किया गया है।
हालांकि शहरी और ग्रामीण विधानसभा के वार्डों को अलग अलग करने में तकरीबन सभी वार्डों की सीमाएं बदली जा चुकी हैं। सभी वार्डों के हिस्सों को दूसरे वार्डों में बांटा गया है। जबकि वोटर लिस्ट के हिसाब से इस वार्डबंदी को इस तरीके से तैयार किया गया है कि शहरी विस के वोटर अपनी विस क्षेत्र के बूथों पर मतदान कर सकेंगे और ग्रामीण के मतदाता अपने विस के बूथों पर मतदान करेंगे।
अब फरवरी में हो सकेंगे चुनाव : एडहॉक कमेटी के सदस्यों का कहना है कि नगर निगम के सदन का कार्यकाल पूरा हुए करीब एक साल हो चुका है। शहर की सरकार का नया गठन अब तक नहीं हो पाया है।
शहर के परिसीमन के नए सिद्धांत और लोस-विस चुनाव की वजह से वार्डबंदी फाइनल नहीं हो सकी। अब इसे फाइनल कर दिया गया है। जिसके आधार पर आगामी निकाय चुनाव होंगे। हालांकि फिलहाल इसे प्रकाशित कर शहर के लोगों से आपत्ति और दावे मांगे जाएंगे।
जरूरत के अनुसार उन पर संज्ञान लिया जा सकता है। इसके बाद सरकार को भेजकर इसे पास कराया जाएगा। इसी के आधार पर नगर निगम क्षेत्र का नया नक्शा बनेगा।