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अब कलेक्टर रेट का पांच प्रतिशत नहीं देना होगा विकास शुल्क

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पानीपत। सरकार ने कलेक्टर रेट के पांच प्रतिशत विकास शुल्क लेने के आदेश को पांचवें दिन वापस ले लिया है। इससे निगम क्षेत्र की 253 कॉलोनियों की पौने दो लाख संपत्तियों पर प्रभाव पड़ा रहा था। सबसे ज्यादा मार शहरी विधानसभा में पड़ रही थी जबकि ग्रामीण विधानसभा के कॉलोनियों को मामूली राहत थी।
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गत 18 फरवरी को जारी आदेश के बाद विकास शुल्क में बढ़ोतरी हो गई थी। इस पर शहरी विधायक प्रमोद विज ने मुख्यमंत्री के संज्ञान में इस मामले का डाला। उनसे मांग की कि आदेश को वापस लिया जाए। इसके बाद सरकार ने यह फैसला वापस ले लिया। इस संबंध में शहरी विधायक चंडीगढ़ में सीएम से मिलने उनके आवास पर भी गए थे।
ये जारी किए थे आदेश
शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने 18 फरवरी से इसे शहर की सभी वैध कॉलोनियों एवं लालडोरा क्षेत्र पर कलेक्टर रेट का पांच प्रतिशत विकास शुल्क लागू कर दिया था। इससे पहले विकास शुल्क की दर 120 से 302 रुपये प्रति गज निधारित थी। ऐसे में जो भवन मालिक 120 और 302 रुपये प्रति गज के हिसाब से विकास शुल्क जमा करा चुके हैं, उनपर भी पांच प्रतिशत विकास शुल्क लागू होना तय था। उन लोगों को विकास शुल्क के अंतर की राशि जमा करानी थी।
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अब इनको राहत
नगर निगम की शहर सीमा के वार्डों में 174 कॉलोनियों है। इनका विकास शुल्क 120 रुपये प्रति गज था। अब फिर से इसी दर से इन कॉलोनियों के लोग विकास शुल्क जमा करवा सकेंगे। इसके अलावा तीन वर्ष पहले नियमित की गईं 79 कॉलोनियों के कुछ लोगों को भी 302 रुपये गज के हिसाब से यानी एक सौ गज के मकान का विकास शुल्क जमा करवाना होगा।
सीएम से लगाई फरियाद, तुरंत की सुनवाई
पांच प्रतिशत कलेक्टर रेट के हिसाब से विकास शुल्क बहुत ज्यादा बना रहा था। इसे देखते हुए सीएम मनोहर लाल से इन आदेशों को वापस करवाने का आग्रह किया गया। सीएम ने भी ये फरियाद तुरंत प्रभाव से सुनी और इन आदेशों को वापस करवाया। इससे शहर के लोगों को एक बड़ी राहत मिली है। -प्रमोद विज, शहरी विधायक, पानीपत।
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