पानीपत। ओमिक्रॉन के खतरे के बीच सरकार ने रात 11 बजे से सुबह पांच बजे तक नाइट कर्फ्यू लगा दिया है, लेकिन दिन में बाजारों, अस्पतालों, बैंक, सड़कों और सामुदायिक केंद्रों पर उमड़ने वाली भीड़ के निमित्त कोई कार्ययोजना तैयार नहीं की गई है। जुलाई के बाद से शहर में एक भी बिना मास्क वाले व्यक्ति का चालान तक नहीं कटा। बैंक, अस्पतालों और दुकानों में सैनिटाइजर का उपयोग भी बंद हो गया। हालात ये हैं कि मई 2021 में प्रतिदिन मास्क और सैनिटाइजर का कारोबार एक करोड़ का था, जो अब 50 हजार पर आ गया है। जिस मास्क की कीमत 20 रुपये थी, वह अब पांच रुपये में मिल रहा है। वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग ने भी समय पर अपनी तैयारी पूरी नहीं की। अगस्त में ही कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए मुख्यालय ने सभी सीएचसी में 25-25 बेड के आइसोलेशन वार्ड बनाने के लिए निर्देश दिए थे। हर बेड पर ऑक्सीजन की सप्लाई रहनी थी, लेकिन पानीपत की सात सीएचसी में 38 बेड की व्यवस्था की गई है, जबकि 175 बेड होने चाहिए। अब कोरोना की तीसरी लहर में दोबारा परेशानी बढ़ सकती हैं।