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पांच महीने से शहर में बिना मास्क वाले एक भी चालान नहीं कटे, मास्क और सैनिटाइजर की बिक्री महज 5 प्रतिशत बची

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पानीपत। ओमिक्रॉन के खतरे के बीच सरकार ने रात 11 बजे से सुबह पांच बजे तक नाइट कर्फ्यू लगा दिया है, लेकिन दिन में बाजारों, अस्पतालों, बैंक, सड़कों और सामुदायिक केंद्रों पर उमड़ने वाली भीड़ के निमित्त कोई कार्ययोजना तैयार नहीं की गई है। जुलाई के बाद से शहर में एक भी बिना मास्क वाले व्यक्ति का चालान तक नहीं कटा। बैंक, अस्पतालों और दुकानों में सैनिटाइजर का उपयोग भी बंद हो गया। हालात ये हैं कि मई 2021 में प्रतिदिन मास्क और सैनिटाइजर का कारोबार एक करोड़ का था, जो अब 50 हजार पर आ गया है। जिस मास्क की कीमत 20 रुपये थी, वह अब पांच रुपये में मिल रहा है। वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग ने भी समय पर अपनी तैयारी पूरी नहीं की। अगस्त में ही कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए मुख्यालय ने सभी सीएचसी में 25-25 बेड के आइसोलेशन वार्ड बनाने के लिए निर्देश दिए थे। हर बेड पर ऑक्सीजन की सप्लाई रहनी थी, लेकिन पानीपत की सात सीएचसी में 38 बेड की व्यवस्था की गई है, जबकि 175 बेड होने चाहिए। अब कोरोना की तीसरी लहर में दोबारा परेशानी बढ़ सकती हैं।

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दूसरी ओर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों की संख्या भी काफी कम है। जिले की सात सीएचसी में स्वास्थ्य विभाग के नियमानुसार 28 चिकित्सक होने चाहिए। प्रत्येक सीएचसी में चार डॉक्टर की तैनाती होनी चाहिए, लेकिन पानीपत की सात सीएचसी में महज 15 डॉक्टर उपलब्ध हैं।

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