पानीपत। गोहाना रोड स्थित पावर हाउस में सिटी एक्सईएन के कार्यालय में बुधवार को खुला दरबार लगा। इस दरबार में पांच घंटे में नौ शिकायर्तें आइं। इनमें से एक का भी समाधान नहीं हो पाया। इस मौके पर पिछली पेंडिंग 10 शिकायतों में से तीन समाधान किया गया।
बुधवार को लगाए गए खुले दरबार में दर्ज सभी शिकायतों को अगले खुले दरबार के लिए टाल दिया गया। सीजीआरफ के चेयरमैन ने कहा कि बुधवार के खुले दरबार में आई नौ शिकायतों का समाधान अगले खुले दरबार में किया जाएगा। इस मौके पर सबसे ज्यादा शिकायतें गलत बिलों को ही लेकर आई। कई उपभोक्ताओं के एक-एक साल पहले के गलत बिल मिले। जिन्हें उपभोक्ता खुले दरबार में लेकर पहुंचे थे। इन शिकायतों में कई ऐसे भी थे जिनके मीटर नंबर किसी और के खाते में चढ़ा दिया गया। जिससे उपभोक्ता का बिल काफी ज्यादा आ रहा है। दूसरी तरफ कई उपभोक्ताओं का कहना था कि शिकायतों का निस्तारण न होने के कारण उन्हें मासूस होकर लौटना पड़ा। वे अपनी शिकायत को कई बार अधिकारियों के समक्ष रख चुके हैं।
उपभोक्ता बोले
ठीक नहीं हो पाया बिजली का गलत बिल
चांदनी बाग निवासी बुजुर्ग सतपाल ने बताया कि 2020 में उनकी बिजली का बिल गलत आया था। दो साल से वह बिल ठीक करवाने के लिए चक्कर काट रहे हैं। आज भी बिल ठीक नहीं हो पाया। अब फिर 11 हजार बिल भेज दिया है। खुले दरबार में फरियाद लगाने के बाद भी न्याय नहीं मिल पा रहा है।
दो साल से काट रहे हैं चक्कर
नई सब्जी मंडी निवासी सन्नी चावला ने बताया कि वह पिछले दो साल से बिल ठीक करवाने के लिए चक्कर काट रहे हैं। दो साल पहले उनके दो पंखे और लाइट का बिल 60 हजार आया था। वह फैक्टरी में काम करतें हैं और उनका वेतन 10 से 12 हजार रुपये है। अधिकारियों से किस्तों में बिल करवाने की गुहार लगाई। अधिकारी तीन किस्तों से ज्यादा नहीं कर रहे हैं।
रियायत देने से मना कर दिया
- समालखा निवासी सुनील ने बताया कि उनका चोरी का केस था। जिस पर 71 हजार जुर्माना लगाया था। 47 हजार रुपये भर दिए थे। 24 हजार पेंडिंग रह गए थे। इसके बाद उनके पिता की मौत हो गई। उनकी माता भी बीमार है। बकाया 24 हजार रुपये जुर्माना का अब 1.80 लाख रुपये भरने के लिए उसे पर्चा पकड़ाया गया है। खुले दरबार में अधिकारियों ने इस केस में कुछ भी रियायत देने से मना कर दिया है।
मीटर का अकाउंट बदल दिया
वधावा राम कॉलोनी निवासी रत्न ने बताया कि उनके मीटर का अकाउंट नंबर बदल दिया गया और किसी दूसरे का चढ़ा दिया। जिससे अब उसका 800 रुपये आने वाला बिल हर महीने 20 से 25 हजार आ रहा है। उनका कहना है कि उन्हें बिजली निगम की गलती का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उसका स्मार्ट मीटर लगने के बाद सारा बिल गलत हुआ है जो कि कर्मचारी ने एसएलसी गलत चढ़ा कर की है।