पानीपत। जिले में खेल प्रतिभाओं को प्रशिक्षित करने के लिए जरूरी सरकारी कोचों की कमी गंभीर समस्या बनती जा रही है। वर्तमान में बास्केटबॉल, मुक्केबाजी और जिमनास्टिक जैसे महत्वपूर्ण खेलों के लिए जिले में कोई सरकारी प्रशिक्षक उपलब्ध नहीं है। इसके चलते खिलाड़ियों को या तो स्वयं अभ्यास करना पड़ रहा है या निजी एकेडमियों का सहारा लेना पड़ रहा है।
खेल विभाग के अंतर्गत विभिन्न खेलों के लिए प्रशिक्षण सुविधाएं तो मौजूद हैं, लेकिन इन तीन प्रमुख खेलों में कोचों की अनुपस्थिति लंबे समय से बनी हुई है। इसका सबसे अधिक असर उन खिलाड़ियों पर पड़ रहा है जो आर्थिक रूप से निजी प्रशिक्षण लेने में सक्षम नहीं हैं।
मुक्केबाजी जैसे खेल में जिले के खिलाड़ियों ने राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक कई उपलब्धियां हासिल की हैं, इसके बावजूद नियमित और तकनीकी प्रशिक्षण की कमी बनी हुई है। कोच की अनुपस्थिति के कारण खिलाड़ियों को सही तकनीक, रणनीति और अभ्यास के दिशा-निर्देश नहीं मिल पा रहे हैं।
खिलाड़ियों अजय और रोबिन ने बताया कि निजी एकेडमियों में प्रशिक्षण उपलब्ध है, लेकिन वहां फीस और अन्य खर्चों के कारण सभी खिलाड़ी प्रशिक्षण नहीं ले पाते। उन्होंने कहा कि इन खेलों में प्रशिक्षक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि सही तकनीक और सुरक्षा दोनों ही जरूरी हैं। कोच के बिना अभ्यास के दौरान चोट लगने का खतरा भी बढ़ जाता है।
खिलाड़ियों का कहना है कि यदि सरकारी कोच उपलब्ध हों तो उन्हें नियमित प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं की बेहतर तैयारी और तकनीकी सुधार में मदद मिलेगी, जिससे प्रदर्शन में सुधार होगा।
बास्केटबॉल, मुक्केबाजी और जिमनास्टिक के कोचों की नियुक्ति के लिए उच्च अधिकारियों को पत्र भेजा गया है। जल्द ही इन पदों को भरने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है। -सत्यवीर पोसवाल, जिला खेल अधिकारी