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Panipat News: जिस आरोप में दीपक को अवैध हिरासत में रखा उसकी प्राथमिकी तक दर्ज नहीं

Tue, 02 Dec 2025 01:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
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पानीपत। सीआईए-3 में तैनात पुलिसकर्मियों की ओर से दीनानाथ कॉलोनी निवासी दीपक को अवैध रूप से हिरासत में रखने के मामले में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं। साइबर ठगों को सिम बेचने के जिस आरोप में दीपक से पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया उसमें कोई प्राथमिकी ही दर्ज नहीं है। अदालत ने कहा- पुलिस की ड्यूटी है कि प्राथमिकी दर्ज कर जांच करें। पीड़ित ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पुलिसकर्मी उसे घर से उठाकर ले गए थे और पहले दिन अवैध हथियार के सिलसिले में पूछताछ की थी। यहीं नहीं उसने पुलिसकर्मियों पर पैसों की मांग करने के भी आरोप लगाए हैं। उधर, अदालत के आदेश पर अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। अदालत 5 दिसंबर को इस मामले में सुनवाई करेगी। दीपक ने बताया कि उन पर लगातार फैसले का दबाव बनाया जा रहा है। अभी पुलिसकर्मी उनके घर पर भी आए थे जिस कारण उनका परिवार दहशत में है। उन्हें डर है कि पुलिस उन्हें किसी झूठे मुकदमे में फंसा सकती है।
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दीनानाथ कॉलोनी के दीपक को सीआईए-3 की टीम ने 24 अक्तूबर की रात को करीब साढ़े 11 बजे घर से उठाया था। इसके बाद बाद उसे 28 अक्तूबर तक हिरासत में रखा गया। दीपक ने बताया कि अवैध हिरासत में रखने के दौरान उनके साथ मारपीट की गई और कई कागजों पर साइन कराए गए। उनकी पत्नी ने अदालत में याचिका दाखिल की थी जिसकी सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आदित्य जैन की अदालत में हुई थी। अदालत से डीएसपी को प्रकरण की जांच करने को कहा था।
डीएसपी ने कोर्ट को बताया था कि बंदी को जाली सिम कार्ड की गैर-कानूनी गतिविधि के बारे में पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था। हालांकि मौका मिलने के बावजूद उस दिन ऐसा कोई रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया। अदालत ने आदेश में कहा कि किसी अपराध की जानकारी मिलती है, तो पुलिस की ड्यूटी प्राथमिकी दर्ज करने और जांच करने की होती है। हालांकि, इस केस में पुलिस ने सब कुछ किया, लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं की।
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सीआईए के स्थान पर पेश कर दी कोर्ट की फुटेज
अदालत ने 28 अक्तूबर को पुलिस से सीआईए-3 थाने की फुटेज अदालत के सामने पेश करने के आदेश दिए थे। लेकिन पुलिस ने अदालत परिसर की फुटेज ही पेश कर दी जिसमें दीपक खुद अदालत में आता दिखाई दे रहा है। उधर, नगला-पार के सरपंच के कहने पर दीपक को छोड़ने का दावा किया गया था उसका भी केस से कोई लेना देना नहीं था। इस पर अदालत ने सख्त नाराजगी जाहिर की थी।
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अभी अदालत के आदेश की समीक्षा की जा रही है। इसके बाद उच्चाधिकारियों के आदेश पर इस प्रकरण में प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।
- सतीश वत्स, डीएसपी मुख्यालय
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