पानीपत/मतलौडा। आदियाना गांव की निशा दहिया ने एशियन खेलों में स्थान पक्का किया है। उनकी इस उपलब्धि से गांव, जिले और प्रदेश में खुशी का माहौल है। निशा कुश्ती के मैदान पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए पदक जीतने के लिए उतरेंगी।
खास बात यह कि निशा ने अपनी खेल यात्रा बास्केटबॉल से शुरू की थी। बाद में उन्होंने कुश्ती को अपना लक्ष्य बनाया। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। उनके पिता रमेश दहिया का सपना था कि उनकी एक बेटी पहलवान बने। निशा ने बचपन से ही इस सपने को साकार करने के लिए मेहनत की। परिवार के प्रोत्साहन से उन्होंने यह मुकाम हासिल किया।
सातवीं कक्षा में उन्होंने जींद के निडानी स्पोर्ट्स स्कूल में प्रशिक्षण लिया। यहां कुश्ती की बारीकियां सीखने के बाद उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया। उन्होंने कई प्रतियोगिताओं में पदक हासिल किए। वर्ष 2014 से वह रोहतक में कोच सत्यवान के मार्गदर्शन में अभ्यास कर रही हैं।
एशियन ट्रायल में जीत और चोट से वापसी
हाल ही में दिल्ली में 30 मई को एशियन ट्रायल प्रतियोगिता हुई। यह निशा के कॅरिअर का महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। उन्होंने पहलवान मानसी लाठर को 4-3 से हराकर एशियन खेलों में जगह बनाई। इस जीत के बाद उनके माता-पिता बहुत खुश हैं। निशा ने बताया कि वर्ष 2024 में पेरिस ओलंपिक ट्रायल से पहले उन्हें कंधे में चोट लगी थी। इस कारण ओलंपिक ट्रायल में वह भाग नहीं ले सकी थीं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 15 पदक और भविष्य की उम्मीदें
चोट से उबरने के बाद उन्होंने पूरी मेहनत और समर्पण से अभ्यास शुरू किया। कई घंटों की निरंतर मेहनत से उन्होंने भारतीय टीम में स्थान बनाया। कोच सत्यवान की देखरेख में उनकी तकनीक और फिटनेस में सुधार हुआ है। वह अब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 15 पदक जीत चुकी हैं। निशा ने कहा कि बेटियों को खेलों में आगे बढ़ने के लिए माता-पिता का सहयोग बहुत जरूरी है।