पानीपत। इस साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी छह जून शुक्रवार को मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व होता है। निर्जला एकादशी को साल की सभी 24 एकादशियों में पवित्र व फलदायी माना जाता है। इस दिन किए दान का फल 100 एकादशियों के दान के बराबर मिलता है।
पंडित प्रवीण शास्त्री ने बताया कि एकादशी छह जून को अर्धरात्रि 2:20 से शुरू होकर सात जून को अलसुबह 4:40 तक रहेगी। इसलिए उदयातिथि के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत छह जून को रखा जाएगा। निर्जला एकादशी का व्रत करने से सालभर की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य मिलता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। इससे विष्णु भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है और माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। व्रती व्यक्ति को विधिपूर्वक एकादशी व्रत करना चाहिए। इस दिन अन्न के साथ पानी भी ग्रहण नहीं कर सकते। इसलिए इसे निर्जला एकादशी कहा जाता है। सबसे कठिन यह इसलिए होती है क्योंकि गर्मी के समय पानी के बिना रह पाना मुश्किल होता है लेकिन इस एकादशी व्रत को निर्जला रखा जाता है। इसलिए यह एकादशी सबसे कठिन व फलदायी मानी जाती है।
दान का विशेष महत्व :
आचार्य लालमणि पांडेय ने बताया कि निर्जला एकादशी पर दान करने का विशेष महत्व होता है। इस दिन दान करना फलदायी सिद्ध होता है। जरूरतमंदों की सेवा करनी चाहिए। कपड़े, चप्पल, जूते, फल, पानी आदि का दान करना चाहिए। दान करने से धन, धान्य, सुख और समृद्धि प्राप्त होती है। इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के सभी पाप समाप्त हो जाते हैं और उसे स्वर्ग लोक में स्थान प्राप्त होता है।