जन स्वास्थ्य विभाग गर्मी शुरू होते ही पेयजल की मांग को पूरा करने के लिए एक्शन में आ गया है। विभाग द्वारा शहर के अप्रूवड वार्डों में दो-दो ट्यूबवेल लगाने का प्रोजेक्ट फाइनल कर लिया है। इन 15 वार्डों में लगने वाले 30 ट्यूबवेलों पर करीब 336 लाख का बजट खर्च होगा।
जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन ट्यूबवेलों को लेकर डिटेल नोटिस इनवाइटिंग तैयार कर ली है और विभागीय अधिकारियों ने जल्द ही ट्यूबवेलों को लगाने काम शुरू करने का फैसला लिया है। शहर में पीने के पानी की समस्या के चलते कॉलोनी वासी डीसी से लेकर विधायकों तक गुहार लगा चुके हैं। लोगों की समस्या को ध्यान में रखते हुए सीएम घोषणा के अनुसार शहर के प्रत्येक वार्ड में दो-दो ट्यूबवेल लगाने की योजना थी, लेकिन जन स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों ने केवल शहर के अप्रूवड वार्डों में ही ट्यूबवेल लगाने की मंजूरी दी है।
शहर के इन वार्डों में लगाए जाएंगे ट्यूबवेल
जन-स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों अनुसार शहर के 15 अप्रूवड वार्डों में योजना के तहत दो-दो ट्यूबवेल लगाए जाएंगे। अप्रूवड वार्डों में वार्ड-3, 4, 8, 9, 10, 11, 14, 15, 16, 17, 18, 19, 20, 21 और 22 शामिल हैं।
साढ़े तीन माह में चालू कर दिए जाएंगे ट्यूबवेल
जन-स्वास्थ्य विभाग की ओर से वार्डों में ट्यूबवेल लगाने का कार्य करीब महीने भर के अंदर शुरू कर दिया जाएगा। विभागीय अधिकारियों अनुसार साढ़े तीन महीने में ट्यूबवेल चालू कर दिए जाएंगे। ट्यूबवेल लगने के बाद गर्मी में लोगों को पीने के पानी की समस्या से काफी हद तक निजात मिल सकेगी।
शहर के नौ वार्डो को नहीं मिले दो-दो ट्यूबवेल
शहर के वार्ड-1, 2, 5, 6, 7, 12, 13, 23 और 24 को ट्यूबवेल नहीं मिले हैं। मुख्यालय द्वारा इन वार्डों को अप्रूवड न बताते हुए ट्यूबवेल लगाने के लिए मंजूरी नहीं दी गई है। ऐसे में गर्मी के दिनों में इन वार्डों में पीने के पानी के लिए कालोनी वासियों को दिक्कतें उठानी पड़ सकती हैं।
यह है शहर में पानी की स्थिति
शहर में पेयजल की मांग जन स्वास्थ्य विभाग पूरी नहीं कर पा रहा है। जिसके चलते गर्मियों में विभाग के साथ लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अधिकारियों के अनुसार शहर को हर रोज 55 एमएलडी पानी की जरूरत है, जबकि जन स्वास्थ्य विभाग 48 एमएलडी पानी की सप्लाई कर पा रहा है। ऐसे में लोगों को प्यासा रहना पड़ता है या फिर दूसरे विकल्प तलाशने पड़ते हैं। कई बार तो पानी की किल्लत के चलते लोगों को सड़कों पर भी उतरना पड़ता है।