समालखा खंड एवं पंचायत कार्यालय में भ्रष्टाचार की बू आने लगी है। जुलाई-अगस्त, 2014 को कार्यकारी बीडीपीओ ने एक ही दिन में दो-दो सरकारी गाड़ी चलाईं और सरकार की परमिशन के बिना प्राइवेट ड्राइवर को वेतन भी दे दिया। इसका खुलासा गांव खोजकीपुर निवासी आरटीआई कार्यकर्ता रमेश वशिष्ठ द्वारा मांगी गई सूचना में हुआ। उसने अब लोकायुक्त को शिकायत देकर गांव के विभिन्न कार्यों में सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा किए गए भ्रष्टाचार की जांच करवाने तथा आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता ने बताया कि आरटीआई के माध्यम से मिली जानकारी में यह सब खुलासा हुआ है।
वशिष्ठ ने लोकायुक्त को दी शिकायत में आरोप लगाया कि गांव खोजकीपुर की जनसंख्या को लेकर सीडीपीओ द्वारा अलग-अलग जानकारी दी गई है। बीडीपीओ कार्यालय बापौली के कार्यालय से आरटीआई के तहत मिली जानकारी और निदेशक पंचायत कार्यालय से मिली जानकारी अलग-अलग है, जबकि दोनों का पत्र क्रमांक और तिथि एक ही है।
आरोप है कि क इसमें भ्रष्टाचार की बू आती है। उन्होंने कहा कि जुलाई-अगस्त 2014 के बीच में बापौली के तत्कालीन बीडीपीओ के पास समालखा का भी अतिरिक्त कार्यभार था। इस दौरान उन्होंने भ्रष्टाचार करते हुए एक ही दिन, एक ही समय में दोनों जगहों की गाड़ियों में उपस्थिति दिखाई है।
इसके अतिरिक्त बापौली खंड में उन्होंने अपने अधीन एक चालक को भी बिना सरकार की अनुमति के रखा और उसका वेतन भी सरकार के खाते से दिया गया। आरटीआई कार्यकर्ता ने लोकायुक्त से मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की है।