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गोद मिली पर नहीं मिला मां का दूध, रिपोर्ट को दादा करेंगे चेलेंज

Sat, 31 Oct 2015 12:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला पानीपत
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जिस परी को अपनों की गोद दिलाने को लेकर चार माह तक लंबी लड़ाई चली और डीएनए जांच हुई। वहीं बच्ची परी अपनों की गोद में गुमशुम नजर आई। दूसरे दिन भी बच्ची को मां का दूध नसीब नहीं हुआ। कविता को दूध नहीं आने पर परी को बोतल से दूध पिलाया गया।
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वहीं दादा राजबीर ने डीएनए रिपोर्ट को गलत बताते हुए कहा कि वह अपनी आवाज सुप्रीम कोर्ट व राष्ट्रपति तक पहुंचाने के दावा किया । डीएनए रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज करेंगे।

सिविल अस्पताल को 136 दिन तक अपना घर समझने वाली बच्ची परी ने शुक्रवार को रामनगर स्थित अपने घर पर
सूरज देखा। दादा राजबीर व दादी कमला ने उसको पूरा लाड प्यार भी दिया, लेकिन उसके चेहरे पर खुशी नहीं चमकी।

परिजनों ने बताया कि साढ़े चार माह तक इंतजार करते-करते मां कविता का दूध भी सूख गया। उसने बच्ची को कई बार दूध पिलाने का प्रयास किया, लेकिन उसको दूध नहीं पिला पाई। वहीं परिवार के छोटे से लेकर बड़े बच्चे और आसपास के लोग भी बच्ची परी को देखने पहुंचे।
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उधर ,  परी को अपने घर जाते ही मच्छरों के बीच सोना पड़ा।  उसके मुंह पर मच्छर काटे जाने के निशान साफ नजर आ रहे थे।  विदित है कि परी को सिविल अस्पताल की नर्सरी में रखा गया था। वहां पर मच्छर व मक्खी तो उसके पास भी नहीं आ पाती थी।

दादा राजबीर बोला प्रशासन ने किया धोखा
रामनगर निवासी अमित ने बेशक बच्ची परी को अपना लिया हो, प्रशासन व पुलिस से आज खफा हैं। दादा राजबीर ने डीएनए रिपोर्ट के साथ इसको ओपन करने पर सवाल उठाए हैं। राजबीर ने बताया कि प्रशासन व पुलिस ने सबसे सामने रिपोर्ट खोलने की बात कही थी, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने बंद करने में रिपोर्ट को खोल दिया। उन्होंने इसकी कॉपी मांगी तो वह भी नहीं उपलब्ध कराई गई। वे रिपोर्ट को चैलेंज करेंगे और किसी प्राइवेट लैब या फिर एम्स में डीएनए कराने की मांग रखेंगे। वे इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति को भी गुहार लगाएंगे। दादा राजबीर ने बताया कि प्रशासन को उनको दूध पिलाने को दिए बच्चे का भी डीएनए कराना चाहिए। प्रशासन को पूरे मामले में दूध का दूध व पानी का पानी साफ नहीं किया।

यह है मामला
सिविल अस्पताल में 18 जून से बच्चा बदलने को लेकर हंगामा चल रहा है। रामनगर निवासी कविता ने डॉक्टरों व स्टाफ नर्स पर बच्चा बदलने का आरोप लगाया था। उसने बताया कि उसकी 17 जून को सिविल अस्पताल में डिलीवरी हुई थी। उसको उस वक्त बच्ची पैदा होने की जानकारी दी गई थी, लेकिन उसको अगले दिन दूध पिलाने को लड़का दिया गया। उसके हाथ पर उसका व उसके पति अमित के नाम का टैग बंधा हुआ था। थाना शहर पुलिस ने उसकी शिकायत पर डॉक्टर व स्टाफ नर्स के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था। परिजनों ने डीएनए कराने की मांग की। पुलिस ने इसको लेकर कई बार तारीख ली। आखिर प्रशासन ने 28 सितंबर को डीएनए कराया, लेकिन रामनगर निवासी कविता नहीं पहुंची। कविता की मांग पर हाईकोर्ट के आदेशानुसार एक अक्तूबर को फिर से डीएनए कराया और 29 अक्तूबर को रिपोर्ट आने के बाद बच्ची को रामनगर निवासी कविता को सौंप दिया।
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