संदिग्ध डेंगू से शहर में एक महिला व एक बुजुर्ग की मौत हो गई। बुजुर्ग रेलवे से सेवानिवृत्त था और कई दिन से असंध रोड स्थित एक निजी अस्पताल में दाखिल था। यहां पर डॉक्टरों ने उसको डेंगू की पुष्टि की थी। आजाद नगर निवासी महिला को दो माह से डेंगू से पीड़ित थी और लंबे समय तक पीजीआई चंडीगढ़ में उपचाराधीन रही।
स्वास्थ्य विभाग दोनों मौतों की पुष्टि नहीं कर रहा है। वहीं, समालखा के हथवाला गांव में रहस्यमय बुखार से एक पखवाड़े में छह लोगों की मौत होने पर हंगामा मच गया। विभाग की टीम ने फीवर मास सर्वे किया और मरीजों का चैकअप कर दवा दी।
लंबे समय से अधिकारियों के दावे तले दबा डेंगू व रहस्यमय बुखार शुक्रवार को एक साथ कई मौतों के साथ सामने आया। तहसील कैंप निवासी रामकिशन (75) की बीती देर रात को असंध रोड स्थित एक निजी अस्पताल में संदिग्ध डेंगू से मौत हो गई।
परिजनों ने बताया कि रामकिशन रेलवे से सेवानिवृत्त था और उसको कई दिन पहले बुखार हो गया। उन्होंने उनको असंध रोड स्थित एक अस्पताल में दाखिल कराया। यहां पर डॉक्टरों ने उसको डेंगू होना बताया और उसका इलाज शुरू कर दिया।
वहीं, शुक्रवार सुबह आजाद नगर निवासी कुलवंत की पत्नी किरण (51) की शुक्रवार दोपहर को मौत हो गई। कुलवंत शर्मा ने बताया कि उसकी पत्नी किरण को दो माह पहले डेंगू हुआ था। उन्होंने उसको पीजीआई चंडीगढ़ में दाखिल कराया और यहां पर लंबे समय तक उपचार चला। वे कुछ सामान्य होने पर डॉक्टर की सलाह पर घर ले गए। किरण की शुक्रवार को अचानक तबीयत बिगड़ गई। वे उसको एक निजी अस्पताल में ले गए। जहां पर डॉक्टरों ने उसको मृत घोषित कर दिया।
हथवाला में पहुंची टीम, मास सर्वे शुरू
समालखा के गांव हथवाला में रहस्यमयी बीमारी के कारण लोगों की मौत होने का मामला सामने आने पर स्वास्थ्य विभाग के पसीने छूट गए। विभागीय टीम गांव में पहुंची और मास सर्वे शुरू किया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कई बीमारों को दवा दी और कई का चैकअप कराया। बुखार से पीड़ित संजीव, बालकिशोर, सुरेश देवी, संजय, श्याम, सुशील, सुषमा व माफी ने बताया कि वे पिछले कई दिनों से बुखार से पीड़ित हैं। गांव में इलाज कराने के बाद वह समालखा से भी उपचार करवाया, लेकिन कोई आराम नहीं हुआ। बुखार में बीमार का शरीर टूटने लग जाता है।
स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन पर फोड़ा ठिकरा
ग्रामीणों ने गांव में बुखार के चलते होने वाली मौत का ठिकरा प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग पर फोड़ा है। ग्रामीण अमरनाथ ने बताया कि प्रशासन की लापरवाही के कारण यह सब हुआ है। स्वास्थ्य विभाग पहले सुध लेता तो गांव में बीमारी इतनी नहीं बढ़ती। गांव के ही कुछ युवाओं ने अपनी तरफ से फॉगिंग भी करवाई, लेकिन कुछ असर नहीं हुआ।
गाजियाबाद की तरफ भाग रहे ग्रामीण
ग्रामीणों ने बताया कि यहां पर उन्हें आराम नहीं आने के कारण वे गाजियाबाद के एक निजी अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को भी दो गाड़ियों में लोग इलाज के लिए गाजियाबाद गए हुए हैं।
सामान्य बुखार, लोग हकीमों के चक्कर में न पड़ें
एसएमओ जितेंद्र त्यागी ने बताया कि गांव के कई मरीजों का चैकअप किया गया है। इसमें सामान्य बुखार आया है। यहां पर डेंगू से कोई मौत नहीं हुई है। इनमें से एक महिला हार्ट की मरीज थी। मरीजों की एनएस वन की रिपोर्ट भी सत्यापित नहीं मानी जा सकती। वे हकीमों के चक्कर में न फंसे और सरकारी अस्पताल में अपना इलाज कराएं।
जिले में डेंगू से किसी की मौत नहीं हुई है और न ही उनको कोई जानकारी लगी है। हथवाला गांव में सूचना के आधार पर टीम रवाना कर दी हैं। वहां पर भी सामान्य बुखार पाया गया है। ग्रामीणों को आश्वस्त किया गया है।
डॉ. इंद्रजीत धनखड़, सीएमओ, पानीपत