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लापरवाही : पुलिस के पास नहीं है किरायेदारों का कोई रिकॉर्ड

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पानीपत। औद्योगिक नगरी से पाकिस्तान के लिए जासूसी करते हुए नोमान इलाही गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके साथ ही बांग्लादेशी घुसपैठिए भी लगातार पकड़े जा रहे हैं। इतना कुछ होने के बाद पुलिस के पास किरायेदारों का कोई रिकॉर्ड तक नहीं है और न ही इनका सत्यापन किया है।
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खास बात यह है कि संवेदनशील माने जाने वाले पानीपत जिले में दिल्ली लालकिला मेट्रो स्टेशन के नजदीक ब्लास्ट के बाद भी किसी के सत्यापन के लिए कोई अभियान नहीं चलाया गया। लोग भी किराये पर मकान देते समय पहचान पत्र और पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराते। ऐसे में अपराधी किस्म और घुसपैठियों को आराम से ठिकाना मिल जाता है।
पानीपत जिला हैंडलूम उद्योग के लिए देश विदेश में अपनी पहचान रखता है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का हिस्सा होने और दिल्ली के नजदीक होने के कारण यह जिला बड़ा संवेदनशील माना जाता है। जिले में छोटी-बड़ी फैक्टरियों में करीब तीन लाख श्रमिक काम करते हैं। इनमें ज्यादातर पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिमी बंगाल के रहने वाले हैं। प्रवासी श्रमिक फैक्टरियों के आस-पास की कॉलाेनियों में किराये के मकान में रहते हैं। लेकिन, शहर में प्रवासी श्रमिकों को किराये पर मकान देते हुए उनका कोई रिकॉर्ड दर्ज नहीं होता। जिस कारण घुसपैठिए भी इसका फायदा उठाते हैं। ऑपरेशन सिंदूर के समय पाकिस्तानी जासूस नोमान इलाही को गिरफ्तार किया गया था।
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इसके साथ ही जिले में बांग्लादेशी नागरिक लगातार पकड़े जा रहे हैं। जिले में होने वाली ज्यादातर चोरी, लूट और हत्या जैसे वारदातों में भी प्रवासियों की संलिप्त होने का आंकड़ा 60 फीसदी से अधिक है। वारदात करने के बाद आरोपी फरार हो जाते हैं। उनकी तलाश करना पुलिस के लिए चुनौती रहता है।
पानीपत से पकड़े जा चुके हैं 54 बांग्लादेशी : पानीपत में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठिए भी रहते हैं। फैक्टरियों के आस-पास की मलीन बस्तियों को घुसपैठियों ने अपना ठिकाना बनाया है। पिछले छह माह में पानीपत पुलिस 54 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ चुकी है। इनके पास कोई दस्तावेज नहीं मिले। इसके बावजूद भी कोई पांच साल से तो कोई 20 साल से पानीपत में ही किराये के मकानों में रह रहा था।
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मकान मालिकों के पास इनकी कोई आईडी नहीं मिली। जो अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।
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