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नीरज चोपड़ा: जिस खेल में बेटा बना स्वर्ण पदक विजेता, उसके बारे में पिता को नहीं था पता, पहली बार देखा लाइव मैच

Sun, 08 Aug 2021 02:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पानीपत (हरियाणा)

सार

नीरज चोपड़ा की मां सरोज ने बाहर आकर अपने लाल नीरज चोपड़ा का मैच नहीं देखा। उनकी मां केवल घर में जाप कर नीरज के लिए दुआएं मांगती रहीं। घर के बाहर पिता सतीश, चाचा भीम, चाचा सुल्तान, दादा धर्मवीर सिंह व डीसी सुशील सारवान के साथ गांव वासियों ने मैच देखा। अपनी आंखों के सामने अपने बेटे को इतिहास रचते देखा। 
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नीरज चोपड़ा और उनके पिता सतीश चोपड़ा। - फोटो : फाइल
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विस्तार
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नीरज रोज स्टेडियम में जाता था, भाला फेंकते हुए वीडियो रिकार्ड करता था और फिर मुझे आकर दिखाता था। उन्हें अब पता लगा कि उस भाले का भार कितना था। नीरज के पिता सतीश चोपड़ा ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि जब नीरज 10 साल पहले वजन कम करने गया था तो शुरुआत में उससे सारे गेम खिलवाए जाते थे, जिसमें से एक जैवलिन भी था। मुझे उस समय नहीं पता था कि उसकी किस खेल में रुचि है लेकिन मैंने कभी उससे नहीं पूछा कि वह किस खेल की तैयारी कर रहा है। वीडियो देखने के बाद पता चला कि उसका पसंदीदा खेल जैवलिन बन चुका है। 

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नीरज को स्टेडियम भेजने से पहले घर में किसी ने भी जैवलिन का नाम नहीं सुना था। पिता ने बताया कि नीरज के बताने के बाद भी उनको पता नहीं चल पाया था कि यह कौन सा खेल है। नीरज ने जब अपने वीडियो दिखाने शुरू किए तो पता चला कि एक भाले को जैवलिन कहते हैं। 

10 साल में पहली बार नीरज के पिता ने ओलंपिक में नीरज का प्रदर्शन लाइव देखा। पानीपत के शिवाजी स्टेडियम में जैवलिन की शुरुआत करने से लेकर आज तक नीरज के पिता न तो स्टेडियम में उसका खेल देखने गए न ही कभी टीवी पर प्रदर्शन लाइव देखा। शनिवार को बेटे का फाइनल मुकाबला पूरे गांव के साथ लाइव देखा, यह पहला मौका था। वहीं कोच जितेंद्र ने बताया कि शिवाजी स्टेडियम में खेल की शुरुआत करने के दौरान भी नीरज के पिता एक बार भी उनका मैच या अभ्यास देखने के लिए नहीं आए। 
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खेल शुरू करने के तीन महीने बाद ही दिलाया था 7 हजार रुपये का भाला

खेल की शुरुआत करने के तीन महीने बाद ही नीरज के पिता सतीश ने उनको 7 हजार रुपये का पहला भाला दिलाया था। जो एल्युमिनियम मिक्स था। नीरज के अच्छे प्रदर्शन को देखते हुए नीरज ने अपना दूसरा भाला लगभग 50 हजार रुपये का लिया था। अब नीरज डेढ़ लाख रुपये के भाले से अभ्यास करते हैं।

मुकाबले में दो बार ज्यादा दूर भाला न जाने पर पिता बोले- कोई बात नहीं 
मुकाबला देखने के दौरान दो बार 80 मीटर से नीचे भाला रह जाने पर नीरज के पिता ने कहा कि कोई बात नहीं। टोक्यो में खेल रहे नीरज को गांव खंडरा से ही प्रोत्साहित किया गया। पिता को देखकर ऐसा लग रहा था कि जैसे वे अपने बेटे के साथ खड़े होकर उसमें जोश भर रहे हों। वहीं मैच देखने के दौरान कई बार खुशी से नाचते तो कई बार मन्नतें मांगते दिखे।
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पिता बोले- नीरज के नाम से जाना जाएगा गांव

ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर नीरज चोपड़ा ने पिता सतीश चोपड़ा का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। नीरज के पिता और किसान सतीश चोपड़ा ने कहा कि चार साल पहले राष्ट्रमंडल खेलों के बाद सब बदल गया। राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण और जूनियर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के बाद से गांव खंडरा के नाम से कम और नीरज का गांव कहकर ज्यादा जाना जाता है। 

लोग कहते हैं कि नीरज के गांव जाना है। अब ओलंपिक में स्वर्ण पदक लाकर नीरज ने गांव का नाम पूरे भारत में प्रसिद्ध कर दिया है। अब देश के लोग खंडरा को नीरज के नाम से जानेंगे। इससे ज्यादा खुशी और क्या हो सकती है। चाचा भीम चोपड़ा ने कहा कि जब तक हमने नीरज को पाला तब तक हमारा बेटा था, अब ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने के बाद वह पूरे देश का बेटा हो गया है।

गांव में आने पर मुंह मीठा करा करूंगा पोते का स्वागत: दादा
दादा धर्मवीर सिंह चोपड़ा ने कहा कि गांव आने पर अपने पोते का भव्य स्वागत करेंगे। मेरे पोते ने पूरे देश का नाम रोशन किया है। मुझे अपने पोते पर विश्वास था कि वह एक दिन देश का नाम जरूर रोशन करेगा।
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