अंबाला। गोबिंद नगर स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथावाचक शशांक भारद्वाज ने नंदोत्सव का विस्तार से वर्णन किया। भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में उत्साह कभी कम नहीं होना चाहिए। आयु से नहीं, बल्कि उत्साह खत्म होने से व्यक्ति बूढ़ा होता है।
कथावाचक ने बिगड़ते खानपान पर चिंता जताते हुए कहा कि जिस दिन से घर से गाय गई है, बीमारियों ने हमें घेर लिया है। उन्होंने बाजार के भोजन के बजाय घर के शुद्ध भोजन की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 10 मिनट में मंगवाया जाने वाला खाना स्वास्थ्य के लिए बड़ा प्रश्नचिह्न है। भोजन की अशुद्धि ही घर की अशांति और अस्पतालों के बढ़ते कारोबार का मुख्य कारण है।
महाराज ने राजा दशरथ और वासुदेव के उदाहरण से सत्य और परम सत्य का अंतर समझाया। उन्होंने बताया कि कैसे वासुदेव ने कंस को दिए वचन के बजाय कृष्ण की रक्षा को चुना, जबकि दशरथ जी ने वचन के लिए परम सत्य राम को वनवास दे दिया। उन्होंने पूतना वध प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को माया और लालच से बचने की सीख दी।
भक्तिमय हुआ वातावरण
चढ़कर नशा न उतरे और ब्रज मंडल का सितारा जैसे भजनों पर पूरा हॉल भक्तिमय हो गया। इस अवसर पर समाजसेवी कपिल विज, प्रधान दिनेश बहल, महासचिव संजय गौरी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। कथा के अंत में संदीप वासन, सूरज राणा और विवेक धीमान परिवार की ओर से प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई।