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निगम खजाना हो चुका खाली, 100 करोड़ के काम की देनी है पेमेंट, फिर भी लगवाए 35.

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नगर निगम का खजाना अभी खाली है। निगम पर करोड़ों रुपये के देनदारी भी है। करीब 100 करोड़ रुपये के काम पहले से चल रहे हैं, जिनका भुगतान निगम को कभी भी करना पड़ सकता है। इन सबके बीच निगम ने मंगलवार को 26 वार्डों में विकास कार्य को लेकर 35 करोड़ 85 लाख 86 हजार रुपये के 115 टेंडर निकाल दिए हैं। कहा जा रहा है कि निगम ने ये टेंडर पार्षदों और विधायक के दबाव में लगवा तो दिए हैं, लेकिन ये महज पार्षदों को खुश करने के लिए ही किया गया है।
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हालात यह हैं कि निगम के आय के स्रोत भी कम हैं, प्रॉपर्टी टैैक्स से भी कोई खास रिकवरी नहीं हो पाई है। अपना राजस्व इकट्ठा करने में भी निगम फिसड्डी साबित हुआ है। शहर की सफाई पर हर साल करीब 60 करोड़ रुपये खर्च किया जा रहा है। वहीं, सीएम ने भी खास तौर पर निगम आयुक्त को आदेश जारी किए हैं कि वे अपनी आय बढ़ाएं और उसी से अपने खर्च निकाले। खाली खजाने को भरने के लिए निगम आयुक्त ने प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच के अधिकारियों को बकाया टैक्स धारकों को फाइनल नोटिस भेजकर रिकवरी के आदेश जारी किए हैं। इसमें सबसे पहले पांच लाख रुपये से अधिक के बकायेदारों को फाइनल नोटिस जारी किया जाएगा। इसके बाद उन इमारतों पर निगम सीलिंग कार्रवाई करेगा। टैक्स ब्रांच ने शहर में ऐसी 235 इमारतों को चिह्नित किया है, जिन पर 5 लाख रुपये से अधिक का टैैक्स बकाया है। अब इनको नोटिस भेजकर रिकवरी कर खजाने को भरने का प्रयास किया जाएगा। इन बकायेदारों पर कुल 94 करोड़ 59 लाख 4 हजार 295 रुपये टैक्स बकाया है। वहीं, इन टेंडरों पर निगम अधिकारियों का मानना है कि अगले माह बजट के बाद निगम में आय के साधन भी बन जाएंगे।
एक से तीन माह का दिया समय
ये टेंडर एक महीने में बंद हो जाएंगे। जो ई-प्रक्रिया के माध्यम से ही लगाए और खोले जाएंगे। 26 मार्च तक टेंडर में कोई भी फर्म अपनी बिड डाल सकती है, जबकि 27 मार्च को बिड खोल दी जाएगी। प्रत्येक टेंडर के काम पूरा करने की तिथि एक से तीन माह तक दी गई है। इन विकास कार्यों मे पार्क, सीवरेज, गली, नालियों व ट्यूबवेलों तक के निर्माण कार्य को शामिल किया गया है। वहीं निगम के पास बजट न होने के बाद भी करोड़ों रुपये के टेंडर लगवाना कहीं न कहीं निगम पार्षदों को लॉलीपॉप देना साबित होगा।
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विधायक ने लगवाए थे स्ट्रीट लाइट टेंडर इसलिए पार्षदों ने भी की जिद
इससे पहले विधायक प्रमोद विज ने करीब 10 हजार स्ट्रीट लाइटों के करीब पौने दो करोड़ रुपये के टेंडर लगवा दिए थे। इनकी शहरी स्थानीय निकाय विभाग से परमिशन भी नहीं ली गई थी। हालांकि निगम अधिकारियों का कहना था कि उन्होंने बाद में परमिशन लेने के लिए पत्राचार किया है। वहीं, पार्षदों के वार्डों के टेंडरों पर रोक लगाई गई थी, जिसके बाद कुछ पार्षद इस बात से नाखुश थे। वहीं कई बार विधायक को इस बारे में कहा जा चुका था। जिसके बाद पार्षदों की बढ़ती नाराजगी दूर करने के लिए उन्हें खुश करने का निगम ने प्रयास किया है।
फ्लोटिंग में होती है पेमेंट
निगम के मौजूदा हालात ये नहीं है कि ये लगाए गए टेंडरों की पेमेंट कर सके। वहीं जो टेंडर पहले से चल रहे हैं उनकी पेमेंट करना भी निगम के लिए चुनौती बन चुका है। हालांकि निगम की पेमेंट फ्लोटिंग में चलती रहती है। बजट के बाद भी निगम को सरकार की तरफ से ग्रांट मिलने की संभावना है।
94 करोड़ आ सकते हैं टैक्स से
निगम ने बकायेदार प्रॉपर्टी टैक्स डिफाल्टरों की सूची तैयार कर ली है। इन पर करीब 94 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का टैक्स बकाया है। अगर निगम नोटिस भेजकर इसे रिकवर कर पाता है तो ये निगम के खजाने का बढ़ा सकती है। वहीं, अब तक निगम अपने बकाया टैक्स में करीब तीन करोड़ रुपये को ही रिकवर कर पाया है।
पार्षदों की सिफारिश और विकास के लिए लगाए टेंडर
काफी दिनों से पार्षदों की वार्डों में विकास कार्यों के लिए टेंडर लगवाने की मांग आ रही थी। जिसके बाद टेंडर लगवाए गए हैं। आगे और भी टेेंडर लगवाए जा सकते हैं। जहां तक बजट का सवाल है निगम के पास बजट भी आ जाएगा।
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-औमप्रकाश, आयुक्त, नगर निगम, पानीपत।
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