-गोल्डन पार्क के पास गलियों में कूड़े के ढेर, गंदगी से अटे नाले
-लोगों ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
समालखा। शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नगर परिषद ने तीन महीने के लिए करीब 51 लाख रुपये का ठेका छोड़े जाने के बावजूद शहर में गंदगी की समस्या दूर नहीं हो पाई है। ठेकेदार के अधीन सफाई कर्मचारियों ने चार अक्तूबर से काम शुरू कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद शहर की गलियों और नालों में गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। गोल्डन पार्क के पास स्थित गली में जगह-जगह कूड़ा जमा होने और नालों के गंदगी से अटे होने के कारण स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गोल्डन पार्क के नजदीक गली में हालात ऐसे हैं कि नाले ओवरफ्लो हो रहे हैं और उनके ऊपर गंदगी जमा है। यहां तक कि मंदिर के बाहर सड़क पर भी कूड़ा बिखरा पड़ा है। इससे लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है।
स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि लाखों रुपये का ठेका दिए जाने के बाद भी शहर गंदगी से मुक्त नहीं हो पाया है। लोगों ने संबंधित अधिकारियों से सफाई व्यवस्था में सुधार करने की मांग की है।
73 कर्मचारियों के भरोसे शहर की सफाई व्यवस्था :
समालखा नगर परिषद के अंतर्गत करीब 62,300 की आबादी आती है। शहर की सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी नगर परिषद के लगभग 73 कर्मचारियों पर है, जिनमें अधिकतर कच्चे कर्मचारी हैं। कर्मचारियों की कमी के चलते शहर के बाजारों से लेकर गली-मोहल्लों तक सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कई स्थानों पर कूड़े के ढेर लगे हैं, जबकि नाले और नालियां गंदगी से अटी पड़ी हैं।
चार सुपरवाइजर और 86 कर्मचारियों की लगाई गई थी ड्यूटी :
शहर की सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए नगर परिषद ने हाल ही में तीन महीने के लिए करीब 51 लाख रुपये का ठेका दिया था। इसके लिए ठेकेदार को वर्क ऑर्डर जारी किया गया और चार अक्तूबर से सफाई का काम शुरू कराया गया। उस समय बताया गया था कि ठेकेदार के चार सुपरवाइजर और 86 कर्मचारी अलग-अलग शिफ्टों में दिन-रात सफाई करेंगे। इसमें गंदगी से अटे नालों और नालियों की सफाई भी शामिल थी।
समालखा नगर परिषद के सचिव प्रिंस मेहंदीरत्ता ने बताया कि मामला संज्ञान में आने के बाद समस्या का समाधान कराया गया है। उन्होंने कहा कि शहर में मुनादी कराकर लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने का काम भी किया जा रहा है।