लगातार घाटे में जा रहे टेंडरों पर निगम ने सख्ती शुरू कर दी है। इसके चलते नगर निगम ने एक बार फिर से 4.21 करोड़ रुपये के आठ टेंडर रद्द किए हैं। इनकी 3.70 लाख रुपये की ईएमडी तक जब्त कर ली है। ये टेंडर 24 से लेकर 37.2 प्रतिशत तक के घाटे में लिए जा रहे थे। जिस पर निगम ने संबंधित ठेकेदारों को नोटिस भेजकर जवाब भी मांगा था कि वे इतने घाटे में काम को गुणवत्ता पूर्वक कैसे कर सकते हैं। लेकिन निगम के नोटिस को ठेकेदार एवं एजेंसी संतोषजनक जवाब ही नहीं दे पाए।
इसके बाद निगम ने इन पर एक्शन लेते हुए इन टेंडरों को रद्द करते हुए इनकी ईएमडी जब्त कर ली है। ये सभी टेंडर निगम की शहरी विंग के अधिकारियों ने शहरी विधानसभा के अंतर्गत लगाए गए कामों के किए हैं। इससे पहले नगर निगम की आउटर एरिया के भी करीब 21 करोड़ रुपये के 44 टेंडर रद्द किए जा चुके हैं। जिनमें निगम ने करीब 17 लाख रुपये की ईएमडी को भी जब्त किया था। ये काम वार्ड नंबर 4, 9, 18, 20, 21, व 23 वार्डों में किए जाने थे। इनमें आरसीसी व टाइलों के रोड व सड़कों समेत बैंच लगवाने का काम भी था।
बता दें कि लगातार घाटों में जा रहे टेंडरों की पूरे प्रकरण को अमर उजाला अखबार ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसके बाद निगम अधिकारियों ने इस प्रकरण पर संज्ञान लिया और एजेंसी व ठेकेदारों को नोटिस देकर तलब करना शुरू कर लिया। इनसे जवाब मांगा गया कि इतनी कम राशि में ये काम कैसे पूरा कर पाएंगे। जवाब में संबंधित एजेंसी और ठेकेदार फेल हुए जिसके बाद निगम ने इनको रद्द कर दिया।
एक रुपये की लागत में से महज 25 पैसे में होना था काम
जनप्रतिनिधियों और शहरवासियों ने भी 40 प्रतिशत तक घाटे में जा रहे टेंडरों पर सवाल उठाते हुए इसे सीधा भ्रष्टाचार तक करार दिया था। इसमें आरोप थे कि एक टेंडर को 40 प्रतिशत घाटे में लिया जाता है, 10 प्रतिशत ठेकेदार को प्रॉफिट होता है, 18 प्रतिशत कार्यालय खर्च होता है, 7 प्रतिशत टैक्स इत्यादि होते हैं तो महज 25 प्रतिशत लागत में कोई भी विकास कार्य कैसे पूरा किया जा सकता है।
ग्रामीण विस के एरिया में होना था 44 प्रतिशत घाटे से काम
शहर के ग्रामीण वार्डों में भी 20 करोड़ 17 लाख 55 हजार रुपये की लागत से 44 ऐसे टेंडर लगाए गए थे, जिनके रेट 17 से लेकर 44 प्रतिशत तक घाटे में लिए गए थे। इनको अमर उजाला ने अपने 6, 9, 18 अक्तूबर समेत कई अंकों में प्रमुखता से प्रकाशित किया। जिसके बाद निगम ने इन सभी टेंडरों को रद्द करते हुए इनकी ईएमडी यानी अर्नस्ट मनी डिपोजिट को भी जब्त कर लिया है, जोकि करीब 17 लाख रुपये का बनती थी।
वर्जन-
नगर निगम ने ज्यादा घाटे वाले टेंडरों पर संबंधित ठेका एजेंसियों से नोटिस भेजकर जवाब मांगा था। जिसमें पूछा गया था कि वे इतने कम रेट में काम को कैसे पूरा कर सकेंगे। कुछ न जवाब नहीं दिया तो कुछ के जवाब से निगम संतुष्ट नहीं हुआ। जिस पर इन टेंडरों को रद्द किया गया है। इनकी ईएमडी को भी जब्त किया गया है।
नवीन सहरावत, एक्सईएन, नगर निगम, पानीपत।