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Panipat News: इकलौते नागरिक अस्पताल में ट्रामा सेंटर नहीं बनवा पाए सांसद

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पानीपत। प्रदेश में जीटी रोड पर एकमात्र पानीपत जिला नागरिक अस्पताल स्थित है। करनाल के घरौंडा से सोनीपत के गन्नौर तक 35 किलोमीटर क्षेत्र में होने वाले सड़क हादसों के घायलों का स्वास्थ्य का जिम्मा नागरिक अस्पताल पर ही है। इसके लिए पानीपत के 14 लाख लोग भी इसी अस्पताल पर निर्भर है लेकिन 200 बेड के इस अस्पताल में आज तक ट्रामा सेंटर की सुविधा नहीं है। ट्रामा के मरीजों को यहां से रोहतक पीजीआई रेफर करना पड़ता है। ऐसे में 40 प्रतिशत ट्रामा रोगियों की समय पर इलाज न मिलने से मौत हो जाती है। 1964 में पानीपत का सरकारी अस्पताल बना था। 60 साल बाद भी कोई सांसद रोगियों के लिए यह महत्वपूर्ण सेवा उपलब्ध नहीं करवा सका है। यहां तक की सांसद के मुद्दों में भी यह जरूरी सेवा शामिल नहीं रही है। 2016 में पूर्व मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने पानीपत में ट्रामा सेंटर की घोषणा की थी लेकिन यह घोषणा सिर्फ घोषणा बनकर ही रह गई है।
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वर्ष 2016 में प्रदेश सरकार ने पानीपत में ट्रामा सेंटर बनाए जाने की घोषणा की थी। एम्स (आल इंडिया इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस) दिल्ली के चिकित्सकों ने यहां के तीन चिकित्सकों को ट्रेनिंग दी थी। इसके लिए पैरा मेडिकल स्टाफ को भी प्रशिक्षण मिलना था। प्रदेश सरकार की ओर से लगभग 65 लाख रुपये भी जारी किए गए। जगह नहीं मिलने के कारण मामला अटक गया था। इसके बाद गांव सिवाह में ट्रामा सेंटर की योजना बनी। जगह भी चिह्नित कर ली गई थी। बाद में सरकार ने उस भूमि को रोडवेज बस अड्डा के लिए दे दी। वर्ष 2017 के बाद सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। विभाग ने 65 लाख रुपये सिविल अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में टाइल-दरवाजे लगाने, मरम्मत और रंग-रोगन पर खर्च कर दिए। नतीजा, जिले में ट्रामा सेंटर की फाइल ठंडे बस्ते में चली गई। जिले में हर साल करीब 500 दुर्घटनाएं होती हैं और 200 से अधिक घायलों की मौत हो जाती है।


वर्जन-
सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि उन्होंने जून 2023 में जिले में ट्रामा सेंटर बनाने के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा है गया । अब तक मुख्यालय की ओर से स्वीकृति नहीं मिली है। यह प्रक्रिया में चल रही है। ट्रामा सेंटर का प्रस्ताव समालखा के पास बनाने के लिए भेजा गया है।
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