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पशुओं में मुंह खुर, गलघोंटू टीकाकरण का 82 प्रतिशत कार्य पूरा

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पानीपत। पशुओं में होने वाली मुंह खुर और गलघोंटू जैसी बीमारियों से बचाव के लिए विभाग द्वारा पशुओं को (कंबाइन) नामक एक इंजेक्शन लगाया जा रहा है। जो पशुओं को साल में केवल दो बार ही लगाए जाते हैं। पशुओं के बचाव के लिए विभाग का ये टीकाकरण अभियान अंतिम चरण में है। करीब 82 प्रतिशत कार्य विभाग पूरा कर चुका है।
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जिले में पशुओं की संख्या करीब 2.35 लाख है जिनमें से 2.15 लाख पशुओं का टीकाकरण किया जाएगा। अब तक 1.95 लाख से अधिक पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। कोरोना की स्थिति को देखते हुए हालांकि इस बार सितंबर की बजाय यह टीकाकरण अभियान नवंबर में शुरू किया गया था। ये संयुक्त टीकाकरण पशुपालन एवं डेयरी विभाग निशुल्क कर रहा है।
इसके अतिरिक्त ये वैक्सीन जिले में स्थित सभी गोशालाओं व नंदीशालाओं में पशुओं को लगाई जा रही है। ये इंजेक्शन हर सरकारी वेटरनरी और डिस्पेंसरी पर उपलब्ध है। हरियाणा ऐसा पहला राज्य होगा जहां पर पशुपालन विभाग 90 प्रतिशत पशुओं को इस कंबाइन इजेक्शन का टीकाकरण करेगा ताकि पशुओं को अगले छह महीने तक यह बीमारी न हो।
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एक भी पशु न छूटे, सुरक्षा चक्कर न टूटे
पशु चिकित्सक डॉ. माणिक पंवार ने बताया कि विभाग द्वारा टीकाकरण अभियान एक भी पशु न छूटे और सुरक्षा चक्कर न टूटे की तर्ज पर हर वर्ष चलाया जाता है। इसके तहत जिले के प्रत्येक गांव, कस्बों व शहर में पशुओं को संयुक्त वैक्सीन के टीके लगाए जाते हैं। पशुओं को टीके लगाते समय कोल्ड चेन का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। वैक्सीन को जेब, पॉलीथीन, थैले व सीधी धूप से बचाकर रखना जरूरी होता है। प्रत्येक पशु को टीका अलग-अलग सुई से लगाया जा रहा है तथा सटरलाइजेशन का विशेष ध्यान रखा जाता है।
अक्सर आते हैं पशु इनकी चपेट में, 24 घंटे में हो जाती है मौत-
सेवानिवृत पशु चिकित्सक डॉ. सुरेंद्र मलिक का कहना है कि पशुओं में लगने वाला यह जीवाणु जनित रोग संक्रमित है और तेजी से फैलता है। अगर लक्षण का पता लगने के बाद पशुओं का शीघ्र इलाज शुरू न किया जाए तो 24 घंटे के भीतर पशु की मौत हो जाती है। यह रोग पास्चुरेला मल्टोसीडा नामक जीवाणु के संक्रमण से होता है। यह जीवाणु सांस नली में तंत्र के ऊपरी भाग में मौजूद होता है। मौसम परिवर्तन के कारण पशु मुंह खुर (गलघोंटू) रोग की चपेट में आ जाता है।
भ्रांति से बचें पशुपालक और इसका रखें ध्यान
गलघोंटू के टीके के लेकर कुछ पशुपालकों में भ्रांति हो जाती है लेकिन इस टीके का कोई साइड इफेक्ट नहीं है। टीकाकरण के बाद न तो दुधारू पशु दूध देना कम करता है, न ही गर्भित पशु पर इस टीके से कोई हानि होती है। यह टीकाकरण चार मास से कम वाले पशुओं व सात मास से अधिक गर्भवती को छोड़कर सभी गाय व भैंस प्रजाति के पशुओं को कोल्ड चैन मेंटेन करते हुए लगाया जा रहा है। - डॉ. संजय अंतिल, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग, पानीपत।
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