बंदरों से शहरवासी परेशान हैं। बंदर काटकर घायल करने से लेकर जानलेवा साबित हो रहे हैं। हर दिन कभी बच्चा तो कभी कोई बुुजुर्ग उनके काटने का शिकार हो रहा है। घरों तक बंदरों आतंक है। लोग कई बार नगर पालिका और डीसी को बंदर पकड़ने की मांग कर चुके हैं, लेकिन अधिकारी इस अंधविश्वास में फंसे हुए हैं कि बंदर पकड़ने का टेंडर जारी करने से उनकी नौकरी खतरे में पड़ सकती है, क्योंकि बंदर पकड़ने से भगवान हनुमान नाराज हो जाते हैं। इस बारे में कोई अधिकारी और पार्षद भी संतुष्ट जवाब नहीं दे रहे हैं। इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
बंदरों ने मचा रखा है आतंक
शहर में बंदरों की भरमार बहुत ज्यादा है। एक अनुमान के मुताबिक शहर में लगभग साढ़े 3 हजार बंदर हैं। हर दिन किसी किसी मोहल्ले में बंदर किसी किसी को घायल कर देते हैं। बंदरों के डर की वजह से लोगों को अपने बच्चों तक को घरों में ही कैद करके रखना पड़ता है। छत पर किसी तरह का कोई सामान छूटने पर बंदर उसको उठा ले जाते है। रेलवे रोड, पड़ाव मोहल्ला, गुड़मंडी, महावीर बस्ती के अलावा कई कॉलोनियां ऐसी हैं, जहां हर वक्त वो बंदर घूमते रहते हैं।
सिविल अस्पताल और समालखा अस्पताल में हर रोज आ रहे केस
बंदर के काटने के केस कुत्ते के काटने से ज्यादा आ रहे हैं। सिविल अस्पताल में हर रोज ऐसे दो और समालखा अस्पताल में ऐसा एक केस रोज आ रहा है। पिछले दो माह में बंदरों के काटने के लगभग 50 केस सामने आ चुके हैं। बावजूद इसके प्रशासन बंदर पकड़ने का टेंडर नहीं निकाल रहा है।
कार सवार ने हॉर्न बजाया, बंदरों को डराया, तब भागे : संतलाल
मैं समालखा में रेलवे रोड के नजदीक रहता हूं। शाम को पानीपत से अपने घर लौट रहा था। घर के पास ही बंदरों ने उसको घेर लिया। इसी बीच, गली में पांच-छह बंदरों का झुंड आ गया। मैंने बचने का प्रयास किया, लेकिन बंदर झपट पड़े और मैं मकान के रैंप पर गिर गया। बंदरों ने मुझे काटने का प्रयास किया। इसके बाद उसने गाड़ी का हार्न बजाया, तब बंदर वहां से भागे।
- संतलाल शर्मा, निवासी समालखा
पिंजरा बनते जा रहे मकान : पांचाल
यहां बड़ी-बड़ी कोठियों पर लोहे के बड़े-बड़े जाल लगाए गए थे। एक तरह से कोठी पिंजरानुमा बनाई गई थी। अमित नारंग ने बताया कि सेक्टर में बंदरों के चलते बच्चे ही नहीं बड़े भी छतों पर नहीं जा सकते। किसी भी समय बंदरों का झुंड आ जाता है। बंदर कपड़े उठा ले जाते हैं। कई बार तो रसोई तक पहुंच जाते हैं। फ्रिज से सामान निकालकर खा जाते हैं। नगर निगम कमिश्नर को आठ महीने पहले भी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
-रिंकू पांचाल, निवासी समालखा
बच्चों को लेकर बना रहा है भय : सुधाकर
बंदर छोटे बच्चों को निशाना बना रहे हैं। वो बच्चों को अकेला घर पर भी नहीं छोड़ सकते। बंदर सीधा घर में घुस जाते हैं। बंदर बच्चों पर हमला करते हैं। कई बच्चों को बंदर काट चुके हैं। वो छतों पर भी जाने से डरते हैं।
- सुधाकर पांडे, निवासी समालखा
वाहनों को भी पहुंचाते है नुकसान
बंदर वाहनों को भी काफी नुकसान पहुंचाते हैं। रसोई में घुसकर सामान उठाकर ले जाते हैं। छत पर सूख रहे कपड़ों को फाड़ देते हैं। गाड़ी पर छलांग लगाते हैं। कई बार गाड़ी के शीशे भी तोड़ देते है।
मीटिंग में मुद्दा पास कराकर लगाएंगे टेंडर : कुमार
जल्द बंदरों को पकड़ने का टेंडर लगाया जाएगा। हाउस की मीटिंग में ये मुद्दा जल्द पास कराया जाएगा और बंदर पकड़े जाएंगे। बंदरों की शिकायतें उन्हें मिल रही हैं।
-प्रदीप कुमार, सचिव नगर पालिका