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पिछले लॉकडाउन का दर्द अब भी जहन में ताजा...

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9 जिलों में वीकेंड लॉकडाउन से प्रवासी श्रमिक भयभीत हैं। अब श्रमिकों का अपने परिवार के साथ पानीपत से पलायन तेज हो गया है। श्रमिकों को पानीपत में लॉकडाउन लगने का भय है। श्रमिकों के जहन में पिछले लॉकडाउन के दौरान हुई परेशानियां अब भी ताजा हैं। इसलिए वे इस बार ऐसी परेशानियों से बचने के लिए पलायन कर रहे हैं। उद्यमियों की माने तो एक लाख से अधिक श्रमिक यहां से पलायन कर चुके हैं। बार-बार समझाने के बाद भी श्रमिक मानने को तैयार नहीं हैं।
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श्रमिकों के पलायन से उद्यमियों को काफी परेशानियां हो रही हैं। धागा, डाइंग, टेक्सटाइल और कारपेट इंडस्ट्री में उत्पादन 60 प्रतिशत तक कम हो गया है। दिल्ली में लॉकडाउन से पहले ही उद्यमियों के करोड़ों रुपये के ऑर्डर फंसे हुए हैं। पिछले लॉकडाउन में उद्योगों को 12 हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा था।
पिछले लॉकडाउन के दौरान जब प्रवासियों को फैक्टरी के मालिक की ओर से आर्थिक सहायता नहीं मिली थी तो प्रवासी भूखे पेट ही पैदल अपने घरों की ओर रवाना हो गए थे। पांच माह तक उद्योगों की रफ्तार थम गई थी। प्रवासी श्रमिकों को मनाने के लिए उद्यमी बंगाल, बिहार, झारखड़, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में उनके घर पर पहुंच गए थे। उनको काफी मनाने के लिए लग्जरी बसों में 30 प्रतिशत अधिक वेतन देकर बुलाया गया था। अब दोबारा फैक्टरी मालिकों की चिंता बढ़ गई है।
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पिछली बार हुई परेशानी नहीं भूले : रवि
बिहार के रवि पासवान ने बताया कि पिछले लॉकडाउन में हुई परेशानी नहीं भूले हैं। वह खाने तक के मोहताज हो गए थे। उनको कहीं से सहायता नहीं मिली थी। इसलिए वह पहले ही घर के लिए पलायन कर रहे हैं। जब स्थिति सामान्य होगी तो वह वापस आ जाएंगे।
बच्चों को परेशानी में नहीं डालना है : अवधेश
अवधेश पासवान ने कहा कि लॉकडाउन से पहले ही वह अपने घर पहुंचना चाहते हैं, क्योंकि उनके साथ छोटे-छोटे बच्चे हैं। बच्चों को पैदल नहीं लेकर जाना है। इसलिए वह पहले ही यहां से अपने घर जा रहे हैं। यहां स्थिति अभी सामान्य नहीं हैं।
स्थिति सामान्य होने के बाद आएंगे : मुरली
मुरली लाल ने बताया कि सरकार धीरे-धीरे दूसरे जिलों में लॉकडाउन लगा रही है। पानीपत में भी लॉकडाउन लग सकता है। पिछले लॉकडाउन में बहुत मुसीबत झेली थी। कोई उनकी मदद के लिए सामने नहीं आया था। अब वह स्थिति सामान्य होने के बाद ही वापस आएंगे
10 हजार की नौकरी के लिए बच्चों का जीवन मुसीबत में नहीं डाल सकते : श्रीकांत
श्रीकांत जाधव ने बताया कि 10 हजार की नौकरी के लिए अपने बच्चों का जीवन संकट में नहीं डाल सकते हैं। वह यहां पर भूखे मरें, इससे अच्छा है कि अपने घर पहुंच जाए, पेट भर के रोटी तो मिलेगी।
फैक्टरियों में कम श्रमिक बचे हैं। डर में श्रमिक जा रहे हैं। उनसे अपील है कि वो भयभीत होकर घर न लौटें। लॉकडाउन की संभावना से गृहमंत्री इंकार कर चुके हैं। श्रमिकों से अपील है कि वे ड्यूटी पर लौट आएं।
- भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन
सभी उद्यमी श्रमिकों के साथ हैं। पहले भी उद्यमियों ने अपनी लेबर का खास ध्यान रखा था। खाने पीने की भी व्यवस्था कराई थी। श्रमिकों से अपील है कि वे पलायन न करें। यहीं पर रहें और काम करें।
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मनीष अग्रवाल, सचिव , चैंबर ऑफ कॉमर्स पानीपत।
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