स्वास्थ्य विभाग को मुख्यालय की ओर से 50 रेमडेसिविर इंजेक्शन मिले हैं। शुक्रवार रात को फार्मासिस्ट इस खेप को लेकर सिविल अस्पताल में आए हैं। इन इंजेक्शन को तीन डॉक्टरों की कमेटी को सौंप दिया गया है। अब कमेटी जरूरत के मुताबिक इंजेक्शन सरकारी व निजी अस्पताल को डॉक्टर के लेटरपैड पर वितरित करेगी। कमेटी के लिए सबसे बड़ी चुनौती इन इंजेक्शन की कालाबाजारी को रोकने की है।
रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी पूरे जिले में चल रही है। कई लोग गिरफ्तार भी किए जा चुके हैं। अब इन 50 रेमडेसिविर इंजेक्शन को कैसे मरीजों तक सही मायने में पहुंचाया जाए, ये प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। इसलिए अब अधिकारी इन इंजेक्शन की खाली वाइल व वाइल पर मरीज के अंगुठे का निशान हो। इस पर मंथन कर रहे हैं। कमेटी में एक प्रशासनिक अधिकारी को भी शामिल करने पर मंथन चल रहा है। सरकारी अस्पतालों में दाखिल मरीजों को फ्री व निजी अस्पतालों में दाखिल मरीजों को ये इंजेक्शन 3500 रुपये में मिलेगा। रोगियों के परिजनों को इस इंजेक्शन के लिए कमेटी से संपर्क करना होगा। इस कमेटी में डॉ. भूपेश चौधरी, डॉ. जितेंद्र त्यागी व डॉ. सुधीर बतरा शामिल हैं।
कमेटी के अधीन रहेंगे इंजेक्शन : डॉ. ग्रोवर
50 इंजेक्शन सिविल अस्पताल में आए हैं। ये इंजेक्शन कमेटी के अधीन रहेंगे। कमेटी की जरूरत के अनुसार इन इंजेक्शन को वितरित करेगी। इंजेक्शन की कालाबाजारी रोकने के लिए कमेटी बनाई गई है।
-डॉ. संजीव ग्रोवर, सिविल सर्जन