पानीपत। गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को निमित कर पूरी सृष्टि को एक उपदेश दिया था। गीता के 18 अध्यायों में हर वर्ग को लेकर संदेश है। यहीं प्राणियों व पशुओं को लेकर भी संदेश दिया है। प्रत्येक व्यक्ति को गीता के उपदेशों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए।
उन्होंने ये प्रवचन शनिवार को श्री अवध धाम मंदिर में कही। वे यहां मंदिर के वार्षिक महोत्सव व श्रीमद्भागवत कथा सत्संग समारोह के पांचवें दिन पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की पवित्र धरती पर उपदेश देकर सबका कल्याण किया है। उन्होंने मोह में भरे अर्जुन को उपदेश देकर युद्ध के लिए तैयार किया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को मोह माया से दूर रहना चाहिए। यही सब उनको भगवान से दूर लेकर जाते हैं। व्यक्ति को इन सबको त्यागकर भगवान की शरण में आना चाहिए। उसको भगवान की शरण में ही आत्मिक शांति की अनुभूति होगी।
भागवत रसिक पंडित राधे-राधे महाराज ने कहा कि साधना की एक अपनी स्वतंत्रता होती है। साधना शब्द इतना सरल है, लेकिन उसको पाना उतना ही कठिन है। साधना शक्ति से प्राप्त की जा सकती है और शक्ति परमात्मा की भक्ति से प्राप्त हो सकती है। उन्होंने कहा कि गुरु अगर साधना के पथ का प्रदर्शक हो जाएं तो इससे बड़ी साधना की परिपक्वता दूसरी नहीं हो सकती। साधक के जीवन में साधना की परिपूर्णता केवल साध्य की प्राप्ति में नहीं है। इससे पहले गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज का अभिनंदन किया। पंचायत एवं सहकारिता मंत्री महिपाल ढांडा शाम के समय कथा में शामिल हुए।