सनौली (पानीपत)। पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश से यमुना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। रविवार को हथिनीकुंड बैराज पर इस वर्ष का सबसे अधिक 1.78 लाख क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा गया। जिससे यमुना नदी में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। पानी तेजी से मैदानी क्षेत्रों की ओर बढ़ गया है। पानीपत में यमुना नदी का जल स्तर पहले से ही चेतावनी बिंदु पर है। जिस कारण जिले में बाढ़ के खतरे को देखते हुए हाईअलर्ट जारी कर दिया गया है।
बापौली, सनौली ब्लॉक में कंट्रोल रूम बना दिए गए हैं। इसके साथ ही गांव-गांव में अलर्ट कर ठीकरी पहरा लगाने के निर्देश दिए गए हैं। तटबंध की निगरानी के लिए सिंचाई विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों को लगाया गया है। बाढ़ के खतरे को देखते हुए सिंचाई विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों की छुट्टी रद्द कर दी गई है।
यमुना नदी हरियाणा और यूपी की सीमा पर बहती है। पानीपत जिले में यमुना नदी राणा माजरा गांव में प्रवेश कर हथवाला तक करीब 36 किमी का सफर तय करती है। नदी के किनारे पर करीब एक दर्जन गांव हैं। जहां पर बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
रविवार को हथिनीकुंड बैराज में इस वर्ष का सबसे अधिक पानी 1.78 लाख क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। बैराज से रविवार सुबह नौ बजे 64, 645 क्यूसेक, 10 बजे 74,304 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। दोपहर बाद एक लाख क्यूसेक से अधिक पानी नदी में छोड़ा गया।
वहीं, चार बजे 1.78 लाख क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा गया। जिससे यमुना नदी में बाढ़ का खतरा बन गया है। पांच बजे फिर से 1.29 लाख क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा गया। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह पानी 24 घंटे में पानीपत की सीमा में प्रवेश करता है। पानीपत जिले में पहले से ही यमुना नदी में खतरे के निशान 231.50 क्यूसेक मीटर पर बह रही है। जिस कारण अगले 24 घंटे में जिले में जलस्तर और अधिक बढ़ जाएगा। ऐसे में बाढ़ के खतरे को देखते हुए हाई अलर्ट कर दिय गया है। यमुना नदी के आस-पास के गांव में ठीकरी पहरा लगा दिया गया है। जिससे रात को पानी आने पर सभी ग्रामीणों को तुरंत अलर्ट किया जा सके। वहीं, सिंचाई विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों की छुट्टी रद्द कर दी गई है। किसानों को तटबंध के अंदर अपने खेतों में ना जाने की सलाह दी गई है।