पानीपत। आधार कार्ड में नाबालिग बेटियों की आयु 18 वर्ष बढ़ाकर शादी कराई जा रही थी। सूचना के बाद इसे बाल विवाह निषेध अधिकारी ने रुकवाया। स्कूल रिकॉर्ड से पता लगा कि दोनों लड़कियां नाबालिग हैं। दोनों के परिजनों को न्यायालय में पेश किया गया। न्यायाधीश ने शादी पर रोक लगा दी है।
महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी रजनी गुप्ता ने बताया कि 21 मार्च को बापौली क्षेत्र के गांव रसलापुर में एक समुदाय की नाबालिग लड़की की शादी कराने की सूचना मिली। जिस पर संबंधित थाने में कॉल कर पुलिसकर्मी को मौके पर भेजा। बारात आने वाली थी। दुल्हन आधार कार्ड में उसकी जन्मतिथि पांच जून 2002 मिली। स्कूल का जन्म प्रमाणपत्र मांगने पर परिजनों ने बताया कि बेटी सिर्फ मरदसे में गई है। इसके बाद गांव के ही प्राइमरी स्कूल में रिकॉर्ड चेक कराया गया। जहां लड़की की जन्मतिथि 27 जनवरी 2005 मिली। वह सिर्फ 17 वर्ष की थी। 24 मार्च को समालखा में सब डिवीजन ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट जोगेंद्री की अदालत में परिजनों को पेश किया। अदालत ने शादी पर रोक लगा दी। परिजनों ने लिखित में लिया गया कि नाबालिग बेटी की शादी नहीं कराएंगे।
दूसरा मामला 24 मार्च का है। चाइल्ड केयर की तरफ से सूचना मिली कि इसराना के गांव डाहर में एक नाबालिग की शादी कराई जा रही है। टीम के साथ मौके पर पहुंचीं। बारात तब तक नहीं पहुंची थी। लड़की की आयु के दस्तावेज मांगने पर परिजनों ने आधार कार्ड दिखाया। इसमें आयु 9 अप्रैल 2003 मिली। परिजनों ने बताया कि बेटी गांव के ही स्कूल में 11वीं कक्षा तक पढ़ी है। स्कूल के रिकार्ड में जन्म 9 अप्रैल 2006 मिला, उसकी आयु महज 16 वर्ष थी। परिजनों को जेएमआईसी विवेक कुमार की अदालत में पेश किया, जहां से शादी पर रोक लगा दी गई।
आधार कार्ड नहीं बल्कि स्कूल रिकॉर्ड और आयु प्रमाणपत्र ही उम्र का सही प्रमाण हैं। परिजनों से अपील है कि नाबालिगों की शादी न करें। आपके आस पास किसी नाबालिग शादी हो रही है तो सूचना दें। - रजनी गुप्ता, महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी