अंबाला। दिल्ली बम धमाके के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हैं। अंबाला पुलिस ने भी एहतियातन रूप से गैराज और कार खरीद बिक्री केंद्रों पर जांच कराई है। हैरानी की बात है कि बिना किसी लाइसेंस या कानूनी मान्यता के शहर में गाड़ियों की खरीद बिक्री की दुकानें चल रही हैं। यहां से गाड़ियां खरीदना इतना आसान है कि आपको किसी भी प्रकार के सत्यापन की जरूरत नहीं है। यही हाल दो पहिया गाड़ियों की दुकानों का है।
इन दुकानों के संचालक कहीं भी दुकान लेकर गाड़ियां सड़क पर खड़ी की फोर सेल का बोर्ड लगा देते हैं और दुकान चलने लगती है। अंबाला कैंट हो या अंबाला सिटी दोनों ही स्थानों पर ऐसे कार डीलरों की संख्या बहुतायात में है, इसके साथ ही अंबाला राजमार्गों के करीब होने के कारण भी यहां राजमार्गों के पास भी कई दुकानें स्थित हैं। गाड़ियों की खरीद बिक्री का मामला इसलिए चर्चा में आया क्योंकि दिल्ली में लाल किले के सामने बम धमाके में बार-बार अंबाला के नाम की चर्चा तेज होने लगी। हालांकि अभी तक पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों ने अंबाला के कनेक्शन को नकारा है।
इनकी चेकिंग का नहीं है कोई प्रावधान
कार व दो पहिया वाहनों के डीलरों की दुकानों पर किन नियमों के तहत गाड़ियों की खरीद व बिक्री हो रही है इसका भी कुछ पता नहीं है। इसके साथ ही किन-किन क्षेत्रों से गाड़ियां अंबाला आ रही हैं और आगे कौन खरीद रहा है इस पर भी किसी की निगाह नहीं है। कई मामलों में तो ये देखा जा रहा है कि डीलर ने एक बार खरीदार को कार पसंद कराई उससे एडवांस लिया और उसे एक शपथ पत्र के सहारे ही गाड़ी बेच दी जा रही है। दोपहिया वाहनों की खरीद बिक्री में तो ऐसा ही चल रहा है।
पंजाब और हरियाणा नंबरों की गाड़ियां हो रहीं बिक्री
अंबाला में गाड़ियों व दो पहिया वाहनों के डीलरों के पास सिर्फ अंबाला ही नहीं बल्कि बाहरी राज्य की गाड़ियां भी बिक्री के लिए आती हैं। इसमें पंजाब और यूपी नंबर भी प्रमुख हैं। इन गाड़ियों को ट्रांसफर कराने का काम भी डीलर ही करते हैं। कई मामलों में तो गाड़ियों को खरीदने वालों को असली मालिक का पता ही नहीं होता है। ऐसे में आसानी से कोई भी व्यक्ति गाड़ी खरीदकर उसका किसी भी कार्य के लिए प्रयोग कर सकता है। इस काम पर निगाह रखने का काम अभी तक कोई सरकारी एजेंसी नहीं कर रही है।
- गैराज व कार खरीद बिक्री करने वाली दुकानों को लेकर मामला संज्ञान में आया है। इसमें आगे कुछ देखकर ही बताया जा सकता है।
सुशील कुमार, सचिव, आरटीए