माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। सड़क दुर्घटना के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमआईसी) श्रेया बंसल की अदालत ने आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया। आरोपी मनीष कुमार पर लापरवाही से वाहन चलाकर गंभीर चोट पहुंचाने के आरोप लगे थे। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने में विफल रहा। इसका प्रमुख कारण शिकायतकर्ता सहित अन्य महत्वपूर्ण गवाह का अपने बयान से पलटना रहा। बरी होने के बाद, आरोपी के जमानत और जमानती बॉन्ड रद कर दिए गए।
वर्ष 2022 में एक्टिवा से टक्कर मारने का लगा था आरोप
यह मामला बराड़ा पुलिस स्टेशन में 31 मई 2022 को दर्ज की गई एफआईआर से संबंधित था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, शिकायतकर्ता ओम प्रकाश ने पुलिस को दिए बयान में कहा था कि 14 मई 2022 की शाम को, जब वह शाहाबाद रोड पर जनता स्कूल बराड़ा के पास अपनी साइकिल से जा रहे थे, तभी एक अज्ञात व्यक्ति ने अपनी एक्टिवा को तेज रफ्तार और लापरवाही से चलाते हुए उन्हें टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि ओम प्रकाश सड़क पर गिर गए, जिससे उनका एक दांत टूट गया और उनके होंठों और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं। टक्कर मारने वाला व्यक्ति भीड़ का फायदा उठाकर अपनी एक्टिवा के साथ मौके से भाग गया था।
शिकायतकर्ता ने पुलिस पर ही लगा दिया आरोप
अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के मामले को झटका लगा जब मुख्य गवाह अपने पहले के बयानों से मुकर गए। शिकायतकर्ता ओम प्रकाश ने अदालत में कहा कि उन्होंने टक्कर मारने वाले व्यक्ति को नहीं देखा था और पुलिस ने उनसे एक झूठा बयान दर्ज करा लिया था। इस मामले में एक अन्य गवाह विपिन कुमार ने भी अभियोजन के मामले का समर्थन नहीं किया। अदालत ने पाया कि जब महत्वपूर्ण गवाह अभियोजन के पक्ष में गवाही नहीं दे रहे हैं, तो संदेह का लाभ आरोपी को दिया जाना आवश्यक है। अदालत ने कहा कि आपराधिक न्यायशास्त्र के मौलिक सिद्धांत के अनुसार, आरोपी तब तक निर्दोष माना जाता है जब तक कि उसका अपराध संदेह से परे साबित न हो जाए।