निगम की इंजीनियरिंग विंग का एक और अनूठा कारनामा सामने आया है। इंजीनियरिंग विंग ने अपनी देखरेेख में शहर में कई सड़कें ऐसी बनवाई हैं, जिनमें आईएसआई मार्के की टाइल तक नहीं हैं। निगम अधिकारियों ने इन कामों की पेमेंट भी करवा दी है। इससे निगम को तो करोड़ों रुपये का चूना लगाया ही गया है, साथ में सड़क की गुणवत्ता पर भी खासा असर पड़ा है। दूसरी हैरानी की बात ये है कि थर्ड पार्टी जांच को प्रभावित करने के लिए कई जगहों पर इन टाइलों को मिक्स कर दिया गया है। यहां आईएसआई व नॉन आईएसआई की टाइलों से सड़क बनाई गई है। निगम ने ये कारनामा इसलिए किया है ताकि अगर थर्ड पार्टी जांच हो तो सैंपल केवल आईएसआई टाइलों का ही दिया जाए। ताकि इसके पास होने पर निगम अधिकारी ठेकेदारों की पेमेंट करवा सकें।
तीसरी हैरानी की बात ये है कि कुछ सड़कों पर पहले और बाद में भी आईएसआई टाइलें लगाई गई हैं, लेकिन दोनों के साइज में काफी अंतर मिला। जिस पर इंजीनियर विंग के विशेषज्ञों से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि साइज में मामूली अंतर चल जाता है, लेकिन बड़ा अंतर सड़क के लिए नुकसानदायक होता है।
भारतीय राष्ट्रीय क्रांतिकारी सेना के अध्यक्ष दिलबाग देेशवाल ने पूरे प्रकरण की शिकायत करते हुए इसकी विजिलेंस जांच करवाने की भी बात की है। वहीं, पूरे मामले की मौके पर जाकर जांच पड़ताल की गई तो टाइलों की बनी सड़कों की सच्चाई सामने आ सकी। लोगों ने ये भी बताया कि जो सड़कें यहां बनाई गई हैं उनके नीचे रोड़ा तक नहीं डाला गया। इन सड़कों की जांच होनी चाहिए।
यहां मिली नॉन आईएसआई मार्का की टाइलों वाली सड़क
वार्ड नंबर दो और तीन के एरिया में देवी मंदिर रोड से लेकर नूरवाला की तरफ जाने वाले मुख्य रास्ते पर भी नॉन आईएसआई मार्के की टाइलें लगी मिली। वहीं, वार्ड तीन के परशुराम कॉलोनी में हनुमान मंदिर के पास व परशुराम मंदिर के पास भी नॉन आईएसआई मार्का की टाइलें लगी हैं। इसके अलावा नूरवाला से लेकर सेक्टर 13-17 की तरफ जाने वाले मेन रास्ते पर आईएसआई मार्का की टाइलों के साइज में बड़ा अंतर देखने को मिला।
शहरी के साथ ग्रामीण एरिया में सबसे ज्यादा गड़बड़ी : देशवाल
दिलबाग देशवाल ने बताया कि शहरी एरिया के साथ ज्यादातर गड़बड़ी ग्रामीण एरिया में की गई है। यहां तकरीबन सभी सड़कों को यही हाल है। या तो नॉन आईएसआई मार्का की टाइलें हैं, या छोटे साइज की हैं। ज्यादातर की थर्ड पार्टी जांच भी निगम अधिकारी मिलीभगत से करवाते हैं। अब इनकी पेमेंट करवाने का काम भी निगम अधिकारी करवा रहे हैं। इसलिए खुद के बचाव के लिए अधिकारियों ने पेमेंट वाली फाइल पर नियमानुसार अपने प्रमाणपत्र नहीं दिए हैं।
अब तो नॉन आईएसआई मार्का की टाइलें बनती ही नहीं हैं। हरियाणा में इनका कहीं प्लांट भी नहीं है। अगर कहीं टाइलें लगी होंगी तो वे पुरानी होंगी। अगर फिर भी ऐसा है तो इसकी जांच की जाएगी।
-प्रदीप कल्याण, एक्सईएन, नगर निगम, पानीपत।