पानीपत। काला आंब का नाम सुनते ही पानीपत की तीसरी लड़ाई की कहानी हर किसी के जेहन में चलने लगती है। इसी धरती पर मराठों और अहमद शाह अब्दाली के बीच 14 जनवरी 1761 को युद्ध हुआ था। यहां इतना खून बहा था कि आम का पेड़ भी काला पड़ गया था। महाराष्ट्र से मराठा यहां आकर हर साल वीरों की याद में शौर्य दिवस मनाते हैं। इस बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस शौर्य दिवस समारोह में बतौर मुख्यातिथि शामिल होंगे। उनके साथ केंद्रीय मंत्री और महाराष्ट्र के दो सांसद, हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा और पंचायत मंत्री कृष्णलाल पंवार शामिल होंगे।
पानीपत शहर से करीब आठ किलोमीटर दूर आयोजन को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यहां स्मारक को सुंदर और पर्यटकों के लिए खास बनाने को लेकर कई घोषणा की लेकिन इनमें से कोई भी सिरे नहीं चढ़ पाई। मराठा हर साल 14 जनवरी को आयोजन करते हैं। इस बीच जिला प्रशासन या फिर पुरातत्व विभाग द्वारा कोई बड़ा आयोजन या फिर रखरखाव की तरफ इतना ध्यान नहीं दिया जा रहा। साल के बाकी दिनों में यह आसपास के गांवों के युवाओं के बैठने का अड्डा है। असल में शौर्य दिवस की निशानी काला आंब अपने शौर्य को तरस रहा है।
ये तीन बड़ी घोषणा जो नहीं चढ़ी सिरे
एक
नहीं जली अमर जवान ज्योति
काला आंब में इंडिया गेट की तर्ज पर अमर जवान ज्योति जलाने की घोषणा की गई थी। कई साल बाद भी यह घोषणा पूरी नहीं हो पाई है। इसमें रिफाइनरी का भी सहयोग लिया जाना था। इसको लेकर हर बार मांग उठती है।
दो
सुंदरीकरण के लिए 20 करोड़ की घोषणा
काला आंब के सुंदरीकरण पर 20 करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा की गई थी। यह पैसा पानीपत रिफाइनरी द्वारा सीएसआर में दिया जाना था। आईओसीएल फाउंडेशन ट्रस्ट के माध्यम से यह पैसा खर्च किया जाना था। इसको लेकर टेंडर भी लगाया गया था लेकिन काला आंब के विस्तार के प्रस्ताव के बाद इसको रद्द कर दिया गया।
तीन
एक एकड़ में भव्य स्मारक बनाना
काला आंब में 2024 में शौर्य दिवस समारोह पर 10 एकड़ में भव्य स्मारक बनाने की घोषणा की गई थी। इसको लेकर काला आंब के साथ में जमीन तलाशी गई। यहां काला आंब की आठ एकड़ समेत 18 एकड़ में यह स्मारक बनाया जाना था। पहले पानीपत रिफाइनरी से सीएसआर के पैसे से जमीन खरीदने पर विचार किया लेकिन यह सिरे नहीं चढ़ पाया। अब जमीन को लेकर हरियाणा सरकार से मांग की जाएगी। इसकी मांग को मंगलवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के सामने फिर से रखा जाएगा।
वर्जन :
काला आंब से मराठों के साथ हरियाणा के रोड़-मराठों की आस्था जुड़ी है। वे हर साल 14 जनवरी को शौर्य दिवस के रूप में मनाते हैं। काला आंब को भव्य स्मारक बनाने पर काम चल रहा है। 10 एकड़ जमीन जल्द ही मिल जाएगी। इसके बाद इसमें व्यापक स्तर पर काम किया जाएगा।
प्रदीप पाटील, राष्ट्रीय अध्यक्ष, शौर्य स्मारक ट्रस्ट।
वर्जन :
काला आंब पुरातत्व विभाग के अंतर्गत है। विभाग द्वारा इसको संजोया गया है। इसमें किसी प्रकार की जरूरत पड़ने पर प्रशासन द्वारा हर संभव सहयोग किया जाएगा।
डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया, उपायुक्त।