-साध्वी प्रवीणा भारती ने श्रीराम कथा महोत्सव में सुनाया शबरी-राम संवाद का प्रसंग
संवाद न्यूज एजेंसी
समालखा। श्री आदर्श रामा ड्रामाटिक क्लब की ओर से पंजाबी रामलीला ग्राउंड में आयोजित 15वें श्रीराम कथा महोत्सव में शनिवार को साध्वी प्रवीणा भारती ने शबरी-राम संवाद का प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा के दौरान उन्होंने भगवान श्रीराम और माता शबरी के मिलन का वर्णन करते हुए भक्ति, प्रेम, विश्वास और समर्पण के महत्व पर प्रकाश डाला। मुख्यातिथि नगर परिषद चेयरमैन अशोक कुच्छल अपनी धर्मपत्नी के साथ पहुंचे। समिति के सदस्याें ने पटका और स्मृति चिह्न देकर उन्हें सम्मानित किया।
साध्वी प्रवीणा भारती ने बताया कि माता शबरी को भगवान श्रीराम के आगमन का लंबे समय से इंतजार था। उन्हें पूर्ण विश्वास था कि एक दिन प्रभु श्रीराम उनकी कुटिया में अवश्य आएंगे। इसी विश्वास और भक्ति के साथ वह प्रतिदिन प्रभु की प्रतीक्षा करती थीं। भगवान श्रीराम ने उनकी निष्कपट भक्ति से प्रसन्न होकर उनकी कुटिया में पहुंचकर उन्हें दर्शन दिए। माता शबरी ने प्रभु का आदर-सत्कार किया और प्रेमपूर्वक बेर अर्पित किए।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के लिए किसी व्यक्ति का धन, पद या प्रतिष्ठा महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उसके मन की पवित्रता और सच्ची श्रद्धा का विशेष महत्व है। माता शबरी का प्रसंग हमें सिखाता है कि सच्चे मन से की गई भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती। प्रभु अपने भक्तों के भाव को देखते हैं, न कि उनकी सामाजिक स्थिति को।
साध्वी ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में प्रेम, सेवा, विनम्रता और परोपकार जैसे गुणों को अपनाएं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतारकर ही समाज में सद्भाव और भाईचारे की भावना को मजबूत किया जा सकता है।
30 -31
संवाद न्यूज एजेंसी
समालखा। श्री आदर्श रामा ड्रामाटिक क्लब की ओर से पंजाबी रामलीला ग्राउंड में आयोजित 15वें श्रीराम कथा महोत्सव में शनिवार को साध्वी प्रवीणा भारती ने शबरी-राम संवाद का प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा के दौरान उन्होंने भगवान श्रीराम और माता शबरी के मिलन का वर्णन करते हुए भक्ति, प्रेम, विश्वास और समर्पण के महत्व पर प्रकाश डाला। मुख्यातिथि नगर परिषद चेयरमैन अशोक कुच्छल अपनी धर्मपत्नी के साथ पहुंचे। समिति के सदस्याें ने पटका और स्मृति चिह्न देकर उन्हें सम्मानित किया।
साध्वी प्रवीणा भारती ने बताया कि माता शबरी को भगवान श्रीराम के आगमन का लंबे समय से इंतजार था। उन्हें पूर्ण विश्वास था कि एक दिन प्रभु श्रीराम उनकी कुटिया में अवश्य आएंगे। इसी विश्वास और भक्ति के साथ वह प्रतिदिन प्रभु की प्रतीक्षा करती थीं। भगवान श्रीराम ने उनकी निष्कपट भक्ति से प्रसन्न होकर उनकी कुटिया में पहुंचकर उन्हें दर्शन दिए। माता शबरी ने प्रभु का आदर-सत्कार किया और प्रेमपूर्वक बेर अर्पित किए।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के लिए किसी व्यक्ति का धन, पद या प्रतिष्ठा महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उसके मन की पवित्रता और सच्ची श्रद्धा का विशेष महत्व है। माता शबरी का प्रसंग हमें सिखाता है कि सच्चे मन से की गई भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती। प्रभु अपने भक्तों के भाव को देखते हैं, न कि उनकी सामाजिक स्थिति को।
साध्वी ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में प्रेम, सेवा, विनम्रता और परोपकार जैसे गुणों को अपनाएं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतारकर ही समाज में सद्भाव और भाईचारे की भावना को मजबूत किया जा सकता है।
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-समालखा। श्री आदर्श रामा ड्रामाटिक क्लब की ओर से पंजाबी रामलीला ग्राउंड में आयोजित 15वें श्रीराम कथा महोत्सव में शनिवार को साध्वी प्रवीणा भारती ने शबरी-राम संवाद का प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा के दौरान उन्होंने भगवान श्रीराम और माता शबरी के मिलन का वर्णन करते हुए भक्ति, प्रेम, विश्वास और समर्पण के महत्व पर प्रकाश डाला। मुख्यातिथि नगर परिषद अध्यक्ष अशोक कुच्छल अपनी धर्मपत्नी के साथ पहुंचे। समिति के सदस्यों ने पटका और स्मृति चिह्न देकर उन्हें सम्मानित किया।
साध्वी प्रवीणा भारती ने बताया कि माता शबरी को भगवान श्रीराम के आगमन का लंबे समय से इंतजार था। उन्हें पूर्ण विश्वास था कि एक दिन प्रभु श्रीराम उनकी कुटिया में अवश्य आएंगे। इसी विश्वास और भक्ति के साथ वह प्रतिदिन प्रभु की प्रतीक्षा करती थीं। भगवान श्रीराम ने उनकी निष्कपट भक्ति से प्रसन्न होकर उनकी कुटिया में पहुंचकर उन्हें दर्शन दिए। माता शबरी ने प्रभु का आदर-सत्कार किया और प्रेमपूर्वक बेर अर्पित किए।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के लिए किसी व्यक्ति का धन, पद या प्रतिष्ठा महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उसके मन की पवित्रता और सच्ची श्रद्धा का विशेष महत्व है। माता शबरी का प्रसंग हमें सिखाता है कि सच्चे मन से की गई भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती। प्रभु अपने भक्तों के भाव को देखते हैं, न कि उनकी सामाजिक स्थिति को।
साध्वी ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में प्रेम, सेवा, विनम्रता और परोपकार जैसे गुणों को अपनाएं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतारकर ही समाज में सद्भाव और भाईचारे की भावना को मजबूत किया जा सकता है।