- एसडी पीजी कॉलेज में हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. बालकिशन शर्मा ने हिंदी साहित्य में प्रेमचंद के योगदान के बारे में बताया
मुंशी प्रेमचंद की जयंती आज
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। मुंशी प्रेमचंद ने उपन्यास और कहानी में जादुई और तिलिस्म की काल्पनिक रचनाओं को पीछे छोड़ गद्य साहित्य में वास्तविकता के दर्शन कराए। लोग गद्य में वास्तविकता और अपने आसपास की समस्या के साथ समाधान पाकर जुड़ते चले गए। भारतीय गद्य साहित्य में मुंशी प्रेमचंद की रचनाओं से हिंदी साहित्य व भारतीय समाज के लिए वरदान साबित हुआ। मुंशी प्रेमचंद का साहित्य देश व प्रदेश की सीमाओं को पार कर विश्व साहित्य में विशेष महत्व रखता है।
मुंशी प्रेमचंद की 31 जुलाई को जयंती है। हरियाणा राज्य गीत के लेखक एवं एसडी पीजी कॉलेज हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. बालकिशन शर्मा से उनकी जयंती पर हिंदी साहित्य में उनके योगदान के बारे में जाना। डॉ. बालकिशन शर्मा ने बताया कि इनसे पूर्व गद्य साहित्य में उपन्यास और कहानी में जादुई और तिलिस्म की काल्पनिक रचनाओं की प्रधानता थी। जिनका वास्तविक सामाजिक जीवन से कोई लेना देना नहीं था। देवकीनंदन खत्री के चंद्रकांता, चंद्रकांता संतति जैसे चमत्कारी उपन्यास लोकप्रिय थे। भूत प्रेत की रचनाएं उपलब्ध थी। मुंशी प्रेमचंद ने सबसे पहले समाज के इर्द-गिर्द विद्यमान सामाजिक समस्याओं को अपनी कहानी और उपन्यास का विषय बनाया।
सजीवता, वास्तविकता व रोचकता आई
गोदान इनका किसान के जीवन पर आधारित अमर उपन्यास है। इनके साहित्य की सबसे अधिक विशेषता यह रही कि इन्होंने कहानी और उपन्यास को कल्पना के आकाश से नीचे उतारकर समाज की स्थिति की हवा भरी। इनकी रचनाओं की सजीवता, वास्तविकता व रोचकता ने इन्हें कहानी और उपन्यास के क्षेत्र का सम्राट बनाया। आगे चलकर इन्हीं के अनुकरण पर अन्य उपन्यासकार व कहानीकारों ने भी सामाजिक जीवन को अपनी रचनाओं का विषय बनाया।
बदलते परिवेश पर की चोट
छठी से सातवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में है। बीए व एमए में कहानी व उपन्यास है। समग्र साहित्य स्वेच्छा से पढ़ा है। वे भी कल्पना की उड़ान जीवन में दूरी पैदा करती है। मुंशी प्रेमचंद ने वास्तविकता का दर्शन कराया। उसी से प्रेरणा लेकर उन्होंने अपने लेखन में यथार्थ पर जोर दिया। हरियाणवी नाटक चलती फिरती छाया, शीर्षक है। इसका वर्णन है कि बड़ा भाई खेती बाड़ी कर अपने छोटों का पालन पोषण करता है, जब वे पढ़ लिखकर मुकाम हासिल कर लेते हैं तो वे बड़े भाई की तरफ मुड़कर नहीं देखते।
समस्याओं का चित्रण आज भी प्रासंगिक
किसान के पक्ष के लिए विकृति व विसंगतियों पर लिखे जा चुके हैं। समस्याओं का चित्रण आज भी प्रासंगिक है। सामाजिक समस्याओं को प्रस्तुत करने के साथ उनके समाधान भी दिखाए। सेवा सदन उपन्यास में बहुत समय से चली आ रही है। धनाड्य व जागीरदारों ने इसको बढ़ावा दिया।