संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। बुआना लाखू गांव की 22 वर्षीय रजनी कश्यप आज मुक्केबाजी की दुनिया में अपने गांव, जिले और देश का नाम रोशन कर रही हैं। साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद मुक्केबाजी में ऐसा मुकाम हासिल किया है जो किसी प्रेरणा से कम नहीं है। बचपन से ही खेलों में दिलचस्पी रखने वाली रजनी ने संघर्ष के रास्ते पर चलते हुए न सिर्फ जिला और राज्य स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी काबिलियत साबित की है।
रजनी ने अब तक जिला स्तर की प्रतियोगिताओं में 18 स्वर्ण पदक और दो रजत पदक अपने नाम किए। राज्य स्तर पर उन्होंने 10 स्वर्ण, दो रजत और चार कांस्य पदक हासिल किए। नेशनल स्तर की बात करें तो रजनी ने पांच स्वर्ण और दो कांस्य पदक जीतकर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश का नाम गर्व से ऊंचा किया। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में 2016 का सर्बिया यूरोप में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी प्रतियोगिता शामिल है। जहां उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर भारत का परचम लहराया। इसके बाद 2019 में स्पेन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी प्रतियोगिता में उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम किया। नोएडा में 21 से 27 मार्च को आयोजित ओपन नेशनल मुक्केबाजी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता है। रजनी फिलहाल एशियन चैंपियनशिप की तैयारी कर रही हैं।
रजनी की सफलता का सफर आसान नहीं रहा। रजनी के पिता जशमेर गांव से लस्सी इकट्ठी कर शहर में बेचते हैं। रजनी की मां उषा एक साधारण गृहिणी हैं। परिवार में रजनी के अलावा पांच भाई-बहन और भी हैं। रजनी के लिए आर्थिक स्थिति हमेशा चुनौती बनी रही लेकिन रजनी ने कभी हालात को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने बीए तक की पढ़ाई की और पढ़ाई के साथ खेल में भी खुद को साबित करने का सिलसिला जारी रखा। रजनी ने बताया कि परिवार और कोच ने हमेशा उन्हें हौसला दिया। उनका लक्ष्य एशियाई स्तर पर और आगे चलकर ओलंपिक में पदक हासिल करना है।
रजनी बुआना गांव में ही कोच सुरेंद्र के मार्गदर्शन में मुक्केबाजी का प्रशिक्षण ले रही हैं। कोच सुरेंद्र ने बताया कि रजनी में बचपन से ही मुक्केबाजी को लेकर जुनून था। वह हर दिन कई घंटों तक अभ्यास करती हैं और कभी थकान को हावी नहीं होने देतीं। उनकी मेहनत और लगन देखकर विश्वास है कि आने वाले समय में वह एशियन और विश्व स्तर पर देश के लिए पदक जीतेंगी।