इवा के साथ असीम और अस्मी। स्रोत : स्वयं
मेरे बच्चों को बचपन से डॉग पसंद हैं। पांच साल पहले उस समय कोरोना काल चल रहा था तब बच्चे घर से बाहर नहीं जा पाते थे और घर में पूरा दिन रहकर उन्हें अकेलापन महसूस होने लगा था। तब परिवार के सभी सदस्यों ने पिल्ला लेकर आने की सलाह बनाई। हम पानीपत से ही एक गोल्डन रिट्रीवर नस्ल का मादा पिल्ला लेकर आए। बच्चों ने जब पहली बार पिल्ले का अपने घर देखा तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। मेरे बेटे असीम और बेटी अस्मी ने मिलकर पिल्ले का नाम इवा रखा। इवा के आने से बच्चों के जीवन का अकेलापन दूर हुआ। आज इवा हमारे परिवार के सदस्य की तरह बन चुकी है। मेरे पति, बच्चे और मैं इवा की पूरी देखभाल करते हैं। उसके खाने, नहलाने, घुमाने का पूरा ध्यान रखा जाता है। छह महीने में एक बार चिकित्सक से जरूर चेकअप करवाती हूं। इवा जब बच्चे स्कूल में जाते हैं तो दिन में मेरे साथ ही रहती है। बच्चों के आने के बाद पूरा समय उनके साथ बिताती है। मैं इवा को खाने में ज्यादातर घर का खाना ही देती हूं क्योंकि बाहर का खाना उसे बीमारी बना सकता है और मैं उसके स्वास्थ्य के साथ कोई लापरवाही नहीं करना चाहती। घर का बना खाना, दही, दूध, लस्सी, पनीर, अंडा, दाल-चावल ही उसे खाने में दिए जाते हैं।
प्रस्तुति- आरती दुआ, मॉडल टाउन पानीपत