पानीपत। एक समय जहां शादी में वीडियो और फोटो एलबम बनवाना बड़ी बात मानी जाती थी, वहीं अब शादियों में अलग डिजाइन की एलबम बनाई जाने लगी है। यही नहीं, दुल्हा और दुल्हन प्री वेडिंग पर फोटो और वीडियो बनवाने जाते हैं। ऐसे में युवा प्री वेडिंग के लिए हिल स्टेशन पर जाना ज्यादा पसंद करते हैं। इनमें भी शिमला व मंसूरी ज्यादा प्रचलित हैं। युवा प्री वेडिंग में ही लाखों रुपये खर्च कर देते हैं। यह एक तरह से स्टेट्स सिंबल बन गया है।
आज के नए तौर-तरीकों से फोटो शूट करा रहे हैं। शादी से पहले लड़का-लड़की फोटो शूट के लिए पहाड़ी इलाकों में जाकर अपना एक मॉडल की तरह फोटो शूट कराते हैं। यह क्रेज लोगों को पसंद आ रहा है। इसको देखते हुए लोगों को अच्छे फोटो खींचने व वीडियो बनाने के लिए फोटोग्राफर की आवश्यकता होती है। इस क्रेज के कारण फोटोग्राफर की अच्छी कमाई हो जाती है। यह काम करने के लिए उन्हें लाखों के हिसाब से रुपये दिए जाते हैं। फोटो खींचने के लिए अलग-अलग तरह की चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। फोटो व वीडियो को बेहतर बनाने के लिए फोटोग्राफर हर संभव प्रयास करते हैं।
इंसार बाजार स्थित बाॅम्बे स्टूडियो के संचालक सोनू ने बताया कि शादी के सीजन में लोगों द्वारा शादी से पहले लड़का-लड़की की प्री वेडिंग में उनको फोटो करवाना या वीडियो बनवाना काफी देखने को मिल रहा है। उन्हाेंने बताया कि उनके पास प्री वेडिंग के लिए काफी सारी बुकिंग आई हुई हैं। फोटो के लिए उन्हें उनकी पसंदीदा जगह जैसे मनाली, गोवा, मंसूरी और शिमला में जाना पड़ता है। इसके साथ ही उनकी कमाई भी अच्छी हो जाती है। इस काम के लिए उन्हें हजारों में नहीं बल्कि लाखों में रुपये दिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह के शूट के लिए उन्हें कई तरह के कैमरों की जरूरत पड़ती है। साथ ही लाखों रुपये लगाकर उनके कई तरह के लेंस को कैमरे से जोड़कर फोटो लिया जाता है। इस तरह के फोटो शूट के लिए एक अलग से टीम की जरूरत पडती है। जो ये सब चीजें संभालकर काम करती है।
युवा एक दूसरे को देखकर प्री वेडिंग का हिस्सा
मतलौडा निवासी 60 वर्षीय कृपाल सिंह ने बताया कि उनके जमाने में फोटो और वीडियो नहीं बनती थी। कुछ समय बाद शादी में फोटो बनवाने लगे। इसके खर्च को भी लोग ज्यादा मानते थे। 1995 के आसपास फोटो और वीडियो का क्रेज आया। सामान्य परिवार अपने लड़कों की शादी में वीडियो और फोटो एलबम बनवाते थे। लड़का और लड़की शादी के दिन ही एक दूसरे को देख पाते थे। आज के आधुनिक दौर में एक दूसरे को देखकर सारे रिवाज ही बदल दिए गए हैं।