मेरी बेटी की इच्छा थी कि घर में लड्डू गोपाल लेकर आएं। मैंने कई बार लाने की योजना बनाई। हर बार कुछ न कुछ अड़चन आ जाती थी। फिर एक दिन लड्डू गोपाल हमारे घर खुद चलकर आए जिससे हमारी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। हमने पुजारी से नामकरण कराया तो अनेक नाम सामने आए। हमने अपने लड्डू गोपाल का नाम देव रखा। हम इनको देव नाम से पुकारते हैं। लड्डू गोपाल को हम अपने परिवार का सदस्य मानते हैं।
उनकी देखभाल अपने परिवार के एक बालक की तरह करते हैं। यह एक मूर्ति नहीं बल्कि बाल रूप में भगवान श्रीकृष्ण हैं। उनकी पूजा और सेवा करने से घर में सौभाग्य, समृद्धि और खुशहाली रहती है। मैं, मेरे पति, बेटी और दोनों बेटे लड्डू गोपाल की सेवा करते हैं। हमें कहीं जाना होता है तो साथ लेकर जाते हैं। उनको घर पर कभी अकेले नहीं छोड़ते। मैं या मेरे परिवार के सदस्यों को किसी प्रकार की दिक्कत या परेशानी होती है तो हम अपने देव के सामने रखते हैं। इसका कुछ ही समय बाद हल निकल जाता है। हम घर पर कोई भी खाना बनाते हैं तो सबसे पहले लड्डू को भोग लगाते हैं। इसके बाद ही परिवार के सदस्य खाना खाते हैं।
प्रस्तुति : संतोष, दत्ता कॉलोनी