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पैर में चोट और अंगुली पकने के बाद भी दौड़े करण, जीता स्वर्ण

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पानीपत। विजेता करण। - फोटो : Panipat
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पानीपत। अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप से एक महीने पहले पैर में चोट लगने पर भी करण ने अभ्यास करना नहीं छोड़ा। उनके दाएं पैर की अंगुली तक पक गई। इसके बावजूद करण ने संयुक्त भारत खेल फाउंडेशन की ओर से नेपाल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में भाग लेकर 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह 400 मीटर दौड़ में उनका पहला अंतरराष्ट्रीय पदक है।
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करण के बड़े भाई आशीष ही उनके कोच हैं। आशीष ने ही करण को खेलों की ओर प्रोत्साहित किया। उन्हें रोज शिवाजी स्टेडियम में ले जाना शुरू किया। दौड़ लगवाई और एक धावक बनने में मदद की। हालांकि आशीष खुद एक मार्शल आर्ट चैंपियन है और लॉ की पढ़ाई कर रहे हैं। छोटे भाई करण के साथ ही खुद भी तैयारी करते हैं। करण ने बताया कि पैर में दर्द रहने के बाद भी दिमाग में 21 से 25 नवंबर तक होने वाली अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप ही चलती रही। इसमें भाग लेने से वह चूक नहीं सकते थे। इसी से उन्हें हिम्मत मिली।
धावक बनने से पहले खेलते थे कबड्डी
धावक बनने से पहले करण कबड्डी खेलते थे। करण ने बताया कि स्कूल स्तर पर कबड्डी से उनकी शुुरुआत हुई। एक अच्छे रेडर बन गए थे, कई मुकाबले जीते। फिर धावक बनने की सोची और इसके लिए तैयारी शुरू की। करण के पिता अनिल कबड्डी के राष्ट्रीय खिलताड़ी रह चुके हैं।
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स्कूली खेल प्रतियोगिता में निखरी प्रतिभा
करण ने बताया कि उन्होंने पहली बार स्कूली खेल प्रतियोगिता के दौरान दौड़ के मुकाबले में भाग लिया था। बिंझौल में हुई खंड स्तरीय स्कूली खेल प्रतियोगिता में पहली बार पदक जीता था। उसके बाद ही लगा कि वह धावक बन सकते हैं। करण का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 400 मीटर की दौड़ में रहा है। हालांकि वह 1600 मीटर दौड़ में भी भाग लेते हैं।
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